औरैया। अब पोषण के अभाव में गोशाला में संरक्षित मवेशी कमजोर और भूखे नहीं रहेंगे। जिले की 53 गोशालाओं से चरागाह की 114.9 हेक्टेयर जमीन को संबद्ध करते हुए नेपियर घास उगाई जाएगी। हरे चारे का प्रबंध करने के साथ ही मोटे अनाज की पैदावार कर मवेशियों को खिलाया जाएगा। गोवंशों को बेहतर पोषण भी मिलेगा।
जिले की 53 गोशालाओं में 10,140 मवेशियों को सरंक्षण दिया जा रहा है। पांच गोशालाओं के निर्माण की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। बांधमऊ में बड़े पैमाने पर गो संरक्षण व संवर्धन की तैयारी है। वहीं पशु सहभागिता के तहत 1823 मवेशियों को बेहतर पालन किया जा रहा है। एक अक्तूबर से शासन स्तर से प्रति मवेशी मिलने वाली 30 रुपये की धनराशि को बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। मवेशियों के सरंक्षण में अब ज्यादा खर्च भी किया जा सकेगा। शासन स्तर से चरागाह की जमीन को गोशालाओं से संबद्ध करने की प्रक्रिया जिले में अंतिम दौर में है।
जिले की 47 गोशालाओं के पास की चरागाह की जमीन को गोशालाओं से जोड़ दिया गया है। बाकायदा गोशाला संचालक इन चिह्नित जमीन पर नेपियर घास से लेकर मक्का, चरी, बाजरा की फसल उगाएंगे। उपज से फसल अवशेष को मवेशियों के सरंक्षण में लाया जाएगा। फिलहाल कई जगहों पर चरागाह की जमीन को सुरक्षित करने का काम शेष है। जिसे देखते हुए तहसील स्तर पर काम किया जा रहा है।
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पांच साल तक देगी हरा चारा
चरागाह की जमीन पर एक बार उगाई गई नेपियर घास चार साल तक मवेशियों के लिए हरा चारा मुहैया कराने का काम करेगी। ऐसे में साल भर मवेशियों को हरा चारा मिल सकेगा। मक्का, बाजरा व जौ की फसल से निकली उपज से भूसा व अनाज का इंतजाम होगा। शासन का यह प्रयास गो संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
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जिले में 114.9 हेक्टेयर चरागाह की जमीन को गोशालाओं से संबद्ध करने का काम पूरा कर लिया गया है। अब इस जमीन पर हरे चारे से लेकर फसलें उगाई जाएंगी। जिससे गोशाला के मवेशी पोषित होंगे। इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।-डॉ. भगवान सिंह, प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी