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सही पोषण से होता शारीरिक और मानसिक विकास

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औरैया। शुरुआती एक हजार दिन बच्चे के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान समुचित देखभाल व सही पोषण बच्चे को बीमारियों से लड़ने के साथ साथ उसे मजबूत और स्वस्थ बनाता है। इन दिनों में लापरवाही बच्चे को हमेशा के लिए कमजोर बनाने वाली साबित हो सकती है।
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वहीं जन्म के एक घंटे अंदर स्तनपान बच्चे के लिए अमृत के समान है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक मां और बच्चे को सही पोषण मिले तो बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है, जो आगे जाकर बच्चे को बीमारियों से बचाता है। इसके लिए स्वास्थ्य और बाल विकास व पुष्टाहार विभाग साथ साथ काम कर रहे हैं। यह बात जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद अवस्थी ने कही।
उन्होंने बताया कि किसी महिला के गर्भवती होने का पता चलते ही उसका गर्भावस्था पंजीकरण आंगनबाड़ी केंद्र पर किया जाता है। नौ माह के अंतराल में प्रसव के पहले दो बार पांच जांचें कराई जाती हैं। एनीमिया से बचाव के लिए हरी सब्जी, दूध, दही, मांस, मछली, मौसमी फल, गुड़, चना, सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है। इसके साथ छह माह तक आयरन की 180 गोली (रोजाना एक गोली का सेवन) अनिवार्य है। यदि गर्भवती में खून की कमी है तो उसे रोजाना दो (छह माह में 360) गोली खाना है।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी बताते हैं डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि गर्भवती व बच्चे का पूर्ण टीकाकरण जरूरी है। उन्होंने बताया कि गर्भ का पता चलते ही महिला को तुरंत टीडी का टीका लगवाया जाता है। उसके एक माह बाद टीडी का दूसरा टीका लगाया जाता है। जन्म के बाद नवजात को बीसीजी, हेपेटाइटिस, पोलियो के टीके लगते हैं। डेढ़ माह में पेंटावेलेंट (प्रथम खुराक) का टीका, ढाई माह में पेंटावेलेंट दूसरी और साढे़ तीन माह में पेंटावेलेंट की तीसरी खुराक दी जाती है। नौ माह में मीजिल्स रुबेला का टीका साथ में विटामिन ए की प्रथम खुराक दी जाती है। डेढ़ साल में मीजिल्स रुबेला और डीपीटी का बूस्टर डोज दिया जाता है।
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