औरैया। ब्लड बैंक का संचालन जिले में न होने से हर किसी को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिले में ब्लड बैंक की मांग धीरे धीरे जोर पकड़ने लगी है। स्वास्थ्य अधिकारियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक लोग इस मांग को लेकर पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को डीएम के पास पहुंचे समाजसेवियों ने जल्द से जल्द ब्लड बैंक खोले जाने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
जिले में ब्लड बैंक न होने से सबसे अधिक असर गरीब तबके के मरीजों पर पड़ रहा है। आलम यह है कि जितना खर्च उन्हें जिले के बाहर के बड़े अस्पतालों में उपचार में खर्च करना पड़ता है, उतना या उससे अधिक वहां तक पहुंचने में खर्च करने को वह मजबूर हैं। 50 शैय्या अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो हर महीने यहां से 40 से 50 रोगी खून की कमी के चलते रेफर होते है। इनमें ऐसे रोगियों की संख्या 25 से 30 के करीब होती है जो मरीज को कानपुर जाने के लिए व्यवस्था करने में देरी कर जाते हैं। उनके पास इतना धन नहीं होता है कि वह जल्द ही मरीज को वहां भर्ती कराने के लिए निकलें।
गुरुहाई मोहल्ला के सभासद छैय्या त्रिपाठी ने बताया कि अधिकांश मरीज कानपुर अस्पतालों तक पहुंचने में दम तोड़ देते हैं। यदि जिले में खून मिलने की व्यवस्था हो, तो मरीजों का आपरेशन जिले में होगा। इससे दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या में कमी आएगी।
ब्लड बैंक जिले में संचालन से जरूरतमंदों को समय पर मिल सकेगा खून
व्यापारी रानू पोरवाल ने बताया कि ब्लड बैंक का संचालन यदि जिले में होगा तो जरूरतमंदों को समय पर खून मिल सकेगा। उन्हें खून के लिए अधिक रुपये खर्च भी नहीं करने होंगे। अधिकांश मरीजों को बड़े अस्पतालों में खून की कमी को पूरा करने के लिए अस्पताल के खर्च से अधिक आने-जाने में खर्च करने को मजबूर होना पड़ता है।
महावीरगंज निवासी हरमिंदर सिंह ने बताया कि पैथालॉजिस्ट की कमी से अस्पताल में रखीं लाखों रुपये कीमत की मशीनें खराब हैं। शीघ्र ही ब्लड बैंक संचालित न हुआ तो खराब मशीनों के चलते भी ब्लड बैंक का संचालन नहीं हो सकेगा
मंगलवार को जिलाधिकारी को विचित्र पहल संस्था के पदाधिकारी व समाजसेवियों ने ज्ञापन देते हुए ब्लड बैंक संचालन कराए जाने की मांग की। समाजसेवियों ने बताया कि ब्लड बैंक का संचालन होने से नगर में छोटे आपरेशन होने से गरीब मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
संस्था के संस्थापक आनंद नाथ गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिला और ब्लड बैंक शुरू कराने और पैथालॉजिस्ट की तैनाती के संबंध में कागजी कार्यवाही तेज करने की मांग समेत पांच सूत्री समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी को बताया कि जिले में ब्लड बैंक संचालन न होने से गरीब तबके को सबसे अधिक समस्या उठानी पड़ रही है। दुर्घटनाओं में घायल गरीबों और अन्य गरीबों को जब बताया जाता है कि खून का इंतजाम करें तभी जान बचेगी तो तीमारदारों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। गरीब तबके के लोग खून के इंतजाम के लिए धन जुटाते हैं तो उससे अधिक उन्हें मरीजों को बडे अस्पतालों में ले जाने के लिए धन जुटाना पड़ता है। बताया कि जो व्यवस्थाएं जिले में आसानी से उपलब्ध हो सकतीं हैं। उसके लिए भी मरीजों को लेकर हजारों रुपये मरीजों के तीमारदारों के खर्च करने पड़ रहे हैं।
खून की कमी से मरने वालों की संख्या जिले में बढ़ रही है। पैथोलॉजिस्ट की कमी पूरी करनी जरूरी है। वह इस कमी को पूरा करने के लिए कागजी कार्यवाही को आगे बढ़ाएं और गरीबों को जिले में ही खून की व्यवस्था की इंतजाम कराएं। इस मौके पर नितिन वर्मा, प्रवीन पांडेय, केशव गुप्ता, डॉ. सक्षम सेंगर, अनुज गुप्ता आदि मौजूद रहे।