स्वावलंबी बनने का सपना देख रही सैकड़ों महिलाएं ठगी
का शिकार हो गईं। संस्था ने इनको धूपबत्ती का कारखाना लगाने को कच्चा माल
देने एवं हर महीने मानदेय देने का सपना दिखाया, किंतु महिलाओं को न तो
मानदेय मिला और न ही कच्चा माल।
इससे खफा महिलाओं ने दिबियापुर
स्थित कार्यालय पर हंगामा किया। सूचना पर आई पुलिस कार्यालय में पैसा जमा
कर रही दो युवतियों को थाने ले गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
महिलाओं
के मुताबिक एक माह पूर्व गुंजन टाकीज रोड पर महिला कल्याण एवं स्वरोजगार
पुनर्वास प्रशिक्षण कार्यक्रम का कार्यालय खोला गया। बताया गया कि उन्हें
धूपबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 500 रुपये देकर
सुपरवाइजर बनना होगा।
प्रत्येक सुपरवाइजर को 20-20 एजेंट बनाकर
उनसे 100-100 रुपये जमा कराने हैं। सुपरवाइजर को धूपबत्ती बनाने के लिए
कच्चा माल एवं हर महीने दो से तीन हजार मानदेय देने का वादा किया गया। लगभग
चार से पांच सौ महिलाएं 500-500 देकर सुपरवाइजर बनीं।
ये एजेंट
बनाकर हर दिन कार्यालय में रुपये जमा कराने लगीं। कई दिन बीतने के बाद भी
इन्हें न तो कच्चा माल मिला और न ही मानदेय। दो दिन पहले महिलाओं ने
कार्यालय में हंगामा किया। सोमवार को महिलाएं फिर कार्यालय पहुंचीं। कच्चा
माल एवं मानदेय के लिए हंगामा करने लगीं।
पुलिस को सूचना मिली तो
मौके पर पहुंची। कार्यालय में रुपये जमा कर रही हेमा और आरती को थाने ले
आई। इनसे हजारों रुपये बरामद हुए। हेमा एवं आरती ने बताया कि वे तो मात्र
रुपये जमा करती थीं। संस्था का मुख्य कर्ताधर्ता तो फर्रुखाबाद निवासी
सुरजीत है।
प्रभारी थानाध्यक्ष पप्पू सिंह ने सुरजीत का फोन मिलाया
तो स्विच आफ मिला। पीड़ित महिलाओं ने तहरीर दे दी है। पुलिस मामले की जांच
कर रही है।
पीड़ित महिलाओं न बताया कि सबसे पहले कन्नौज में
कार्यालय बनाकर महिलाओं को जोड़ा गया। इसके बाद सहार में कार्यालय खोला
गया। अब दिबियापुर में कार्यालय खोलकर महिलाओं को जोड़ा जा रहा था। संस्था
का एक कार्यालय महेवा इटावा में भी चल रहा है।
आरोप लगाया कि संस्था के संचालक ने हजाराें महिलाओं के साथ ठगी की है। महिलाओं संचालक को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।