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रबी फसल की कटाई मड़ाई पूरी, अब खरीफ की तैयारी

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औरैया। रबी फसलों की कटाई व मड़ाई का कार्य लगभग खत्म हो चुका है। किसान अब खरीफ की खेती में जुटेंगे। इसे देखते हुए किसानों के साथ ही कृषि विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। जिले में इस साल 48 हजार 700 हेक्टेयर में धान की खेती होगी। इसके लिए सात किस्म के धान के 313 क्विंटल बीज का आवंटन शासन ने किया है, जो जिले में पहुंचना शुरू हो चुका है। इस पर 50 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। इसमें मोटे और महीन प्रजाति के कई किस्म के बीज शामिल हैं।
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खरीफ में खासकर धान की फसल के लिए नर्सरी तैयार करनी होती है। यह 21 से 30 दिन में तैयार होती है और इसके बाद किसान नर्सरी से निकाल धान की रोपाई करते हैं। जिले के कई इलाकों में रोहिणी नक्षत्र में ही नर्सरी डालने का काम शुरू हो जाता है जो मई माह के अंतिम सप्ताह से आरंभ होता है।
इसे देखते हुए कृषि विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि महीन व मोटा किस्म के आधार व प्रमाणित बीज की मांग की गई जो पहुंचने लगी है। करीब 313 क्विंटल धान का बीज विभाग को उपलब्ध होना है। 60 फीसदी बीज विभाग को उपलब्ध हो चुका है।
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यह बीज किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि किसानों को पूरा मूल्य देना होगा और अनुदान की राशि उनके खातों में वापस की जाएगी। जैतापुर के किसान दलवीर सिंह कहते हैं कि बीज हमेशा क्षेत्र की जलवायु व मिट्टी के मुताबिक होना चाहिए। धान की रोपाई का काम शुरू हो चुका है, ताकि मानसून आते ही धान की रोपाई की जा सके। अगेती धान की खेती के लिए रोहिणी नक्षत्र में नर्सरी डालने का समय उपयुक्त है।
मिर्जापुर निवासी राकेश चौधरी ने कहा कि सहार व औरैया ब्लॉक में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन सिंचाई के लिए किसान निजी संसाधनों पर निर्भर है। नर्सरी डालने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि जिले के कई हिस्से में रोहिणी नक्षत्र में किसान धान की नर्सरी लगाने का कार्य करते हैं। इसको देखते हुए विभाग की ओर से धान के बीज मंगाने की प्रक्रिया शुरू है। ढेंचा का बीज भी उपलब्ध है। इसकी बुवाई कर धान की रोपाई के पूर्व इसकी जोताई कर सकते हैं। इससे खेतों में नाइट्रोजन, कार्बन व जीवांश में वृद्धि होगी। 20 फीसदी तक यूरिया की बचत हो सकेगी।
बिना उपचारित बीज का न करें प्रयोग
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई के लिए 800 से 1000 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र की जरूरत होती है। नर्सरी से पहले बीज को अंकुरित करना जरूरी है। इसलिए नर्सरी डालने से पहले स्ट्रेप्टामाइसिन सल्फेट 90 प्रतिशत, ट्रेट्रासाईक्लीन हाईड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की चार ग्राम मात्रा 100 लीटर पानी में मिलाकर बीज को घोल में रात भर भिगो दें। दूसरे दिन बीज को छानकर उपचारित बीज को गीले बोरे में लपेटकर ठंडे कमरे में रखें। बोरे पर पानी का छीटा देते रहें। 36 से 48 घंटे बाद बोरे को खोलें। बीज अंकुरित होकर नर्सरी डालने के लिए तैयार हो जाते हैं।
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