सुख और दुख एक दूसरे के पूरक है। दोनों के बिना मानव जीवन पूर्ण
नहीं हो सकता है। एक के बिना दूसरे का कोई अस्तित्व नहीं है। हमें जीवन
में कभी भी सद्मार्ग को नहीं छोड़ना चाहिए। यह मार्ग हमेशा उन्नति की ओर
ले जाता है। यह बात अटसू में चल ही रामकथा के दौरान कथा वाचिका सुधा दीदी
ने कही।
नगर पंचायत के अटसू कस्बा हालेपुर रोड पर चल रही रामकथा के
दौरान सुधा दीदी ने भक्तों से कहा कि संसारिक प्राणियों को मर्यादा में
रहकर वाक्य पटुता करनी चाहिए। सीताराम का जीवन चरित्र इसका प्रेरणाश्रोत
है। कथा के पांचवें दिन सीता राम विवाह की कथा श्रवण के दौरान बताया गया
कि नारी के बिना जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है। बिना नारी के समाज का
उत्थान नहीं हो सकता है। जीवन में सुख और दुख तो आते-जाते रहते हैं।
मनुष्य को कभी सद्मार्ग का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। कथा श्रवण के दौरान
सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
अतिथि के सत्कार में न करें संकोच-आचार्य
अतिथि और ब्राह्मण के सत्कार के लिए हमें दूसरों से कुछ मांगना
पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए। मोक्ष पाना है तो संतों का सम्मान करना
चाहिए। गाय घर में होगी तो लक्ष्मी भी घर में रहेगी। यह बात भक्तों को कथा
का रसपान कराते हुए आचार्य संजय द्विवेदी ने भक्तों के बीच कही।
बिधूना
नगर के पुराना बरधायी बाजार में चल रही श्रीमद भागवत कथा महोत्सव में
आचार्य पंड़ित संजय द्विवेदी ने भक्तों से कहा कि गाय का दूध शरीर के लिए
अमृत के समान होता है। गाय के मूत्र सेे अनेकों रोगो का अंत होता है।
उन्होने प्रवचन के दौरान कहा कि अतिथि और ब्राह्मण के सत्कार के लिए यदि
हमें दूसरों से कुछ मांगना पडे़ तो संकोच नही करना चाहिए। इसे अपना सौभाग्य
समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में यदि लक्ष्मी जी आ जाएं
तो उसे सिर झुका लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए गाय की
रक्षा करना अनिवार्य है। नारी, गाय, संत और अतिथि का अनादर करने वाले का
सभी संसार में भला नहीं हो सकता है। ऐसे लोगों को स्वर्ग नहीं नर्क मिलता
है।