औरैया। जिले की ग्राम पंचायतों में मनमाने ढंग से विकास कार्य कराकर सरकारी धन खर्च करने वाले प्रधान व सचिव प्रतिवर्ष ऑडिट नहीं कराते। इसके बावजूद ग्राम निधि के खातों में करोड़ों रुपये हस्तांतरित कर दिए जाते हैं। इस बार प्रधानों पर शिकंजा कसा गया है। ऑडिट न कराने वाले प्रधानों को चुनाव लड़ने से वंचित रहना पड़ सकता है।
पंचायतीराज निदेशक किंजल सिंह ने डीपीआरओ को ग्राम पंचायतों को ऑडिट कराने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा कि केंद्रीय वित्त व राज्य वित्त आयोग की गाइड लाइन में ऑडिट कराना अनिवार्य है। इसमें ग्राम पंचायतें फरफार्मेंस ग्रांट व राज्य वित्त की ऑडिट अनुशंसा की धनराशि से वंचित न रह जाएं। सचिव व प्रधानों को अपनी ग्राम पंचायतों का प्रतिवर्ष ऑडिट कराने निर्देश दिए गए हैं।
धनराशि शर्त में आपत्ति आने पर उसे प्रधान व सचिव से वसूली कर जमा कराने को कहा गया है। इसे कैशबुक में भी अंकित कराकर ऑडिट आपत्ति का एक सप्ताह के अंदर निस्तारण करने के आदेश दिए गए हैं। अधूरे पड़े शौचालय 15 दिन के अंदर पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। विदित है कि जिले में 477 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में ऑडिट कराया ही नहीं है।
वहीं करीब 32 ग्राम पंचायतों की शिकायतें की जा चुकी हैं। प्रभारी डीपीआरओ राजेश चौरसिया ने बताया कि ऑडिट के लिए ब्लॉकों को रोस्टर जारी कर दिया गया है। ऑडिट न कराने वाले प्रधानों को अदेय प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे। इससे वह चुनाव में प्रतिभाग नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में प्रधानों को पत्राचार किया जा रहा है।