औरैया। यदि भक्त अपने मन को निर्मल कर सद्मार्ग पर चलने के लिए भगवान से कुछ मांग करते हैं तो भगवान भी उसकी जरूर सहायता करते हैं। यह बातें आचार्य सुशील शुक्ला ने शंकर लाल का बाग स्थित शिव मंदिर पर आयोजित भागवत कथा में रविवार को रुक्मणी विवाह कथा का वर्णन करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य सत्य के मार्ग को अपनाता है।
आचार्य ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को सुमंगल वर की प्राप्ति होती है। कथा सुनने को मंडप में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही।