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Auraiya News: बोगस फर्मों से 8.62 करोड़ की कर चोरी करने वाले चार शातिर गिरफ्तार

Sat, 25 Apr 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-67- पुलिस गिरफ्त में पकड़े गए कर चोरी के आरोपी। संवाद
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औरैया। जीएसटी चोरी के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम व कोतवाली पुलिस ने बोगस फर्मों से 8.62 करोड़ की कर चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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मेरठ के निवासी इन आरोपियों में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी शामिल है। ये अपराधी फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट पास ऑन करने का खेल रहे थे। पूछताछ के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से चारों को इटावा जेल भेज दिया गया।

एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि मामले की शुरुआत 23 फरवरी 2026 को हुई। तब राज्य कर अधिकारी औरैया विजय शंकर दीक्षित ने मून इंटरप्राइजेज, खानपुर के खिलाफ जीएसटी चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि यह फर्म सिर्फ कागजों पर थी और घोषित पते पर अस्तित्व में नहीं मिली। पुलिस जांच में जब कड़ियां जोड़ीं तो वह आरोपियों तक पहुंच गई।
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पुलिस ने मेरठ के थाना नौचंदी के मोहल्ला शास्त्री नगर निवासी मोहम्मद अतहर, थाना लिसाड़ी गेट तारापुरी रोड निवासी सीए शाह आलम, थाना सिविल लाइंस के मोहनपुरी निवासी विशाल और थाना किठौर के गांव महलवाला निवासी मोहम्मद इमरान को गिरफ्तार किया।
गिरोह ने मून इंटरप्राइजेज और चमन ट्रेडर्स हापुड़ के नाम की बोगस कंपनियां बनाकर करोड़ों के फर्जी बिल दिखाए थे। इसमें मून इंटरप्राइजेज के माध्यम से कुल 2.87 करोड़ रुपये की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिल काटे गए। वहीं चमन ट्रेडर्स के माध्यम से 5.75 करोड़ की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिलों का लेनदेन पाया गया।
एसपी ने बताया कि मोहम्मद अतहर गिरोह का मुख्य संचालक, जिसने मून इंटरप्राइजेज का एक्सेस खरीदकर खेल शुरू किया। शाह आलम व उसका सहायक विशाल अकाउंटेंसी का पूरा काम देखते थे और फर्जी बिल तैयार करते थे। इमरान फर्जी दस्तावेज जुटाकर नई बोगस फर्में तैयार करवाता था।
आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई के केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर अवैध आर्थिक लाभ कमा रहे थे। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह तार किन शहरों से जुड़े हैं।

बिना माल क्रय-विक्रय के डकार रहे थे टैक्स का पैसा

पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे केवल कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाकर सरकार से आईटीसी क्लेम करते थे। असल में धरातल पर किसी भी माल का लेन-देन नहीं होता था। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और इन फर्जी फर्मों से लाभ उठाने वाले अन्य व्यापारियों की तलाश में जुट गई है।
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ये हुआ बरामद
कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों पास से तीन लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, तीन डोंगल, एक हार्ड डिस्क, दो पेनड्राइव, 16 डीएससी डिवाइस (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट), दो स्मार्ट एआई राउटर के अलावा 60330 रुपये व छह टैक्स इनवॉइस बिल की प्रतियां और अन्य फर्जी कागजात बरामद हुए हैं।
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एमबीए डिग्री धारक है बोगस फर्मों से जीएसटी चोरी गिरोह का सरगना

औरैया। बोगस फर्मों से कर चोरी करने के मामले में पकड़ा गया सरगना मोहम्मद अतहर एमबीए डिग्री धारक हैं। वहीं उसके साथ इस पूरे फर्जीवाड़े में पकड़े गए अन्य आरोपी भी पढ़े लिखे हैं। यही कारण है कि बड़ी सफाई से उन्होंने करोड़ों की कर चोरी को अंजाम दिया।
मोहम्मद अतहर ने ही सीए शाह आलम के साथ मिलकर बोगस फर्मों से कर चोरी का षड्यंत्र रचा। इसके लिए शाह आलम ने अपने साथ एलएलबी के छात्र विशाल को भी साथ लिया था। बस इसके बाद ही फर्जी फर्में बनाकर और कर चोरी का सिलसिला शुरू कर दिया। मोहम्मद इमरान केवल 10वीं पास है। ऐसे में उसे फर्जी कागजात जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह फर्जी कागजात जुटाकर सीए शाह आलम को देता था। इसके बाद वह उन कागजों से बोगस फर्म बनाता था।
मोहम्मद अतहर इस पूरे कामकाज को देखता था। वहीं शाह आलम ने अकाउंट्स का काम देखने के लिए एलएलबी के छात्र विशाल को भी अपने साथ शामिल कर लिया था। इसके बाद वे बीते करीब चार सालों से ये पूरा सिंडिकेट चला रहे थे।
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पते पर पहुंचे अधिकारी तो नहीं मिली फर्म
मून इंटरप्राइजेज को भगौतीपुर रोड, खानपुर के पते पर 17 अक्तूबर 2022 मोहम्मद चांद के नाम पंजीकृत कराया गया था। इसके बाद संदिग्ध बिलिंग प्रतीत होने पर कर विभाग ने 28 फरवरी 2023 को पंजीकरण निरस्त कर दिया। संचालकों को कई बार नोटिस देने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। 13 फरवरी 2023 को विभाग ने फर्म के पते पर जांच की गई तो वहां कोई फर्म संचालित नहीं मिली। इसके बाद ही राज्य कर विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी थी, जो प्राथमिकी पर आकर खत्म हुई।

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फूलप्रूफ था प्लान, पुलिस के बुलाने पर खुद ही आए थे औरैया
राज्य कर अधिकारी विजय शंकर दीक्षित की ओर से कर चोरी की एफआईआर दर्ज कराने के बाद गठित एसआईटी और कोतवाली पुलिस जांच में जुट गई। जांच में तार मेरठ से जुड़ने पर पुलिस ने मोहम्मद अतहर और शाह आलम समेत अन्य को पूछताछ के लिए औरैया कोतवाली बुलाया। बुलाने पर तीन बार सभी आरोपी कोतवाली पहुंचे।
उन्हें लगा कि उनका प्लान था फूलप्रूफ है कि वे पकड़े नहीं जाएंगे। लेकिन पुलिस जांच में उनके खिलाफ सबूत मिलने पर वह टूट गए और उन्होंने पूरे फर्जीवाड़े की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
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