औरैया। जिला संयुक्त चिकित्सालय में दांतों से संबंधित समस्याओं के लिए न तो आधुनिक मशीनें हैं, न ही चिकित्सक के पास सहायक। दांतों की सफाई जैसा काम भी जिला अस्पताल में नहीं हो पा रहा है। लोगों को मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में दंत व नेत्र रोग विभाग एक ही कक्ष में संचालित होता है। दंत रोग विभाग में एक चिकित्सक मोहित गहोई हैं पर वह डेंटल सर्जन नहीं हैं। सीमित संसाधनों के बीच इस विभाग में दांत दर्द, दांतउखड़वाना, मुख कैंसर का प्रारंभिक स्थिति में पता लगाने का काम ही हो पाता है। अस्पताल में रूट कैनाल, डेंटल सर्जरी, सफाई जैसे महत्वपूर्ण काम नहीं हो पाते। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दांत सफाई करने वाली मशीनों के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है।
डेंटल सर्जन रूट कैनाल करने में दक्ष होते हैं। जब दांत का संक्रमण पल्प तक पहुंच जाता है, तो रूट कैनाल प्रक्रिया द्वारा संक्रमित ऊतक को हटा दिया जाता है और दांत को सील कर दिया जाता है। इसके अलावा मसूड़ों की बीमारी (पायरिया) के लिए स्केलिंग और रूट प्लानिंग जैसे उपचार उपलब्ध होते हैं, जो मसूड़ों से प्लाक और बैक्टीरिया को हटाते हैं। इसके साथ ही ऑर्थोडोंटिक्स प्रक्रिया भी करते हैं। इसमें दांतों को सीधा करने और काटने की समस्याओं को ठीक करने के लिए ब्रेसेस या एलाइनर्स का उपयोग शामिल है। इसके अलावा जबड़े की सर्जरी भी डेंटल सर्जन करते हैं। इन सब सुविधाओं से जिला अस्पताल आने वाले मरीज वंचित हैं।
अस्पताल में डेंटल सर्जन नहीं हैं। वर्तमान में दांतों में दर्द, दाढ़ उखड़वाना, मुंह में कैंसर की प्रारंभिक जांच आदि कार्य किए जा रहे हैं। दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सहायक व मशीनों के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
- डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, सीएमएस