फोटो-10- एसएनसीयू में भर्ती नवजात की जांच करते डॉ. रंजीत कुमार। संवाद
औरैया। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में फॉलिक एसिड (विटामिन बी-9) की कमी नवजात शिशुओं को जन्म के साथ बीमारी दे रही है।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल के ओपीडी में इन दिनों ऐसे पांच-10 मामले सामने आ रहे हैं। जहां नवजात बच्चे गंभीर बीमारियों और विकृतियों के साथ पैदा हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण माताओं में पोषण और फॉलिक एसिड की कमी है।
चिचौली मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रंजीत कुमार ने बताया कि फॉलिक एसिड शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (न्यूरल ट्यूब) के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। इसकी कमी से बच्चों में रीढ़ की हड्डी का ठीक से बंद न होने और मस्तिष्क का पूरी तरह विकसित न होने जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। इससे बच्चे आजीवन दिव्यांगता का शिकार भी हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा, नवजात शिशुओं में कटे होंठ, दिल की बीमारियां, धड़कन और गंभीर एनीमिया (खून की कमी) की समस्या भी देखी जा रही है। अक्सर महिलाएं गर्भधारण के काफी समय बाद डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, जबकि फॉलिक एसिड की सबसे ज्यादा जरूरत शुरुआती तीन हफ्तों में होती है।
गर्भधारण की योजना बनाने के समय से ही महिलाओं को फॉलिक एसिड सप्लीमेंट्स शुरू कर देने चाहिए। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और खट्टे फलों को अपने दैनिक आहार में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को इस खतरे से सुरक्षित रखा जा सके।
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