शहर में बिजली से जुड़ी हर प्रकार की समस्या को दूर करने के लिए शुरू हुई आरएपीडीआरपी योजना पटरी से उतर गई है। तीन साल पहले इस योजना के लिए 14 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इस बजट से पांच साल तक शहर में बिजली से जुड़ी समस्याएं दूर करनी थीं। लेकिन योजना तीन साल में ही दम तोड़ गई। इससे शहर के उपभोक्ताओं को योजना का लाभ मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। विभागीय अधिकारी गर्मी को कारण बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
केंद्र व प्रदेश सरकार ने मिलकर जिले में तीन साल पहले आरएपीडीआरपी (रीस्ट्रक्चर एक्सीलिरेटिड पॉवर डेवलपमेंट रेगुलेटरी प्रोग्राम) लागू किया था। इसमें 14 करोड़ रुपये से शहर की बिजली व्यवस्था को पांच साल तक समस्या रहित रखना था। इसके लिए सभी जर्जर तारों को बदला गया। जरूरत के मुताबिक क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों की क्षमता उच्चीकृत की गई। घरों में पुराने मीटर हटाकर नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए गए।
प्रत्येक ट्रांसफार्मरों पर लोड को पता करने के लिए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए गए थे। लगभग पांच दर्जन से अधिक साठ एमवीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए। लेकिन अब हालात यह हैं कि ट्रांसफार्मर लोड बढ़ते ही धुआं उगलने लगते हैं। आए दिन ट्रांसफार्मर में फाल्ट से बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। मजे की बात तो यह है कि करोड़ों खर्च होने के बाद समस्या जस की तस है। अधिकारी इसे गर्मी के दिनों में उत्पन्न हुई समस्या बताकर पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
गर्मी के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। आरएपीडीआरपी मेें तीन साल पहले किए गए काम से अब कनेक्शन बढ़े हैं। हालांकि समस्या आने पर उसकी मरम्मत भी कराई जाती है। अभी पूरे शहर में योजना के तहत तारों को नहीं बदला जा सका है। ऐसे में कुछ समस्या बरकरार है।
शशिकांत मौर्या
जेई सदर, बिजली