औरैया। बेटी की मौत पर इंसाफ मांगने वाले पिता ने अदालत में गवाही के दौरान बयान बदल दिए। न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी पति को दोषमुक्त कर दिया।
वहीं झूठी गवाही देने और अदालत को गुमराह करने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने वादी पिता के खिलाफ ही कार्यवाही के आदेश दिए हैं।
चपौली निवासी सुनील बाबू ने कोतवाली पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी मधु देवी की शादी दो साल पहले गांव जोगीपुर निवासी अनुज कुमार के साथ हुई थी। चार जून 2022 को मधु का शव ससुराल में फंदे से लटका मिला। इसके बाद पिता सुनील बाबू ने मामले में ससुरालीजन पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। कोर्ट में सत्र परीक्षण के दौरान वादी सुनील बाबू और उनकी पत्नी शारदा देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य आरोपों से मुकर गए।
पिता ने सशपथ कहा कि उनकी बेटी शादी के पहले से ही मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त थी और उसी से तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली थी। शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि वादी ने प्रथम सूचना रिपोर्ट में जो आरोप लगाए थे, परीक्षण के दौरान वह उनसे पूरी तरह हट गया और झूठी गवाही दी।
न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है, इसके आधार पर आरोपी पति अनुज कुमार को दोषमुक्त कर दिया गया।
इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि झूठी गवाही देने के कारण वादी सुनील बाबू के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 383 के तहत वाद दर्ज किया जाए।