औरैया। पराली की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए कृषि विभाग को पूसा बायो डी-कंपोजर के 23,400 पाउच प्राप्त हो गए हैं। यह किसानों को निशुल्क दिए जाएंगे। यह कैप्सूल पांच तरह के जीवाणुओं से मिलकर बनाया गया है, जो फसल के लिए लाभदायक साबित होगा।
जिले में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। पराली प्रबंधन को लेकर किसान परेशान हैं। इस समस्या से निदान के लिए कृषि विभाग को शासन से बायो डी-कंपोजर के 23,400 पाउच प्राप्त हुए हैं। जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, बिधूना व सहार के राजकीय बीज भंडारों पर बायो डी-कंपोजर पाउच उपलब्ध करा दिए गए हैं।
डी-कंपोजर पाउच का उपयोग कर किसान पराली को खाद के रूप में तब्दील कर सकेंगे। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूसा डी कंपोजर में कवक की सात प्रजातियां शामिल है, जो पराली को मिट्टी में बदलने में सौ फीसदी कारगर है। इस डी कंपोजर से किसान भूसा भी गला सकते हैं। इसका उपयोग करने से पर्यावरण को भी किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
डी-कंपोजर तैयार करने की विधि
पांच लीटर पानी में सौ ग्राम गुड़ डालकर उबालना है। इसके बाद इस घोल को ठंडा होने के लिए रख दें। घोल के ठंडा होने इसमें बेसन मिलाकर अंधेरे कमरे में दस दिन के लिए रख दें। दस दिन बाद इस घोल को पराली में छिड़काव करें। इससे पराली खाद में तब्दील हो जाएगी।
वर्जन
पराली प्रबंधन में पूसा बायो डी कंपोजर वरदान साबित होगा। किसान इसका प्रयोग कर पराली को खाद में तब्दील कर सकते हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय भी बढ़ेगी। जिले के राजकीय भंडारों पर पूजा डी कंपोजर किसानों के लिए निशुल्क उपलब्ध है। - शैलेंद्र कुमार वर्मा, उप कृषि निदेशक