दिबियापुर। बंगलूरू में मजदूरी करने गए थाना क्षेत्र के गांव समाधन का पुरवा निवासी मजदूर उमेश चंद्र (43) की इलाज के दौरान संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मंगलवार को जब शव गांव पहुंचा तो परिजन में चीख-पुकार मच गई। इकलौते कमाऊ सदस्य की मौत से परिवार पर संकट छा गया है। परिजन की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक की पत्नी संध्या कुमारी ने बताया कि उनके पति नौ सितंबर को गांव मेरखपुर निवासी लेबर सप्लायर के साथ बंगलूरू के वेंकटेश्वर क्षेत्र में भवन निर्माण कार्य के लिए गए थे। परिजन का आरोप है कि सोमवार सुबह सप्लायर ने उमेश के भाई गुरुनारायण को फोन कर सिर्फ इतना बताया कि तबीयत खराब है और ऑक्सीजन लगी है। इसके बाद परिजन को सही जानकारी दिए बिना सीधे उमेश की बेटियों को मौत की सूचना दे दी गई।
भाई गुरुनारायण का कहना है कि जब उन्होंने बंगलूरू जाने की बात कही तो सप्लायर उन्हें गुमराह करता रहा और उमेश का मोबाइल भी अपने पास रख लिया। मृतक के पांच बेटियां और एक 12 वर्ष का बेटा है। मंगलवार को शव गांव पहुंचा, जिससे परिजन में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजन से घटना के बारे में पूछताछ की।
क्राइम निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि पत्नी की तहरीर पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट में मौत का सही कारण स्पष्ट हो सकेगा।