शहर में एक लाख से ऊपर के बकाएदारों के खिलाफ बिजली विभाग की ओर से चलाया जा रहा वसूली अभियान बिजली बिल घोटाले की भेंट चढ़ रहा है। आलम यह है कि विभाग पर लगे इस दाग के चलते कोई भी अधिकारी व कर्मचारी बकाया वसूली के लिए अब फील्ड पर जाने से कतरा रहा है। इससे दिसंबर माह में दिए गए डेढ़ करोड़ के टारगेट को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
बिजली विभाग को दिसंबर माह में बकाया रेवेन्यू वसूली को सदर एसडीओ के स्तर पर डेढ़ करोड़ रुपये रेवेन्यू वसूली का टारगेट निर्धारित किया गया है। इस टारगेट को हर हाल में अधिकारियों को पूरा करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। बिजली विभाग में पिछले डेढ़ साल में हुए करोड़ों रुपये के घपले के उजागर होने के बाद अब कोई भी अधिकारी वसूली के लिए क्षेत्र में जाने को तैयार नहीं है।
इससे विभाग को एक ओर जहां बकाया टारगेट की वसूली न हो पाने से नुकसान उठाना पड़ रहा है तो वहीं पहले से ही अधिकारियों की मिली भगत से करोड़ों रुपये की चपत लग चुकी है। ऐसे में दो तरफा मार के चलते जिले के बिजली विभाग को रेवेन्यू की वसूली में घोटाले से चलते नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सदर एसडीओ अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि एक तरफ बिलों में घोटाला किए जाने से वैसे ही विभाग की बदनामी हो रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं के पास वसूली को जाने पर उनके तीखे व्यंग्य सुनने को मिलते हैं। जिससे न तो उनकी बातों का मेरे पास कोई जबाव ही होता है और न ही वसूली को सख्त कदम उठा पा रहा हूं। ऐसे हालातों में अब कैसे काम किया जा सकता है। फिलहाल फील्ड में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं।