औरैया। सुप्रीम कोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता में छूट देने से इन्कार कर दिया। इससे शिक्षकों में मायूसी छाई है।
उधर फिलहाल कार्यरत शिक्षकों को राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने टीईटी पास करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी है। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त, 2027 थी। टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को एक साल के अंदर ये परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी।
इस मामले को लेकर शिक्षकों में निराशा देखी जा रही है। शिक्षक इस सब के बावजूद साल 2010 से पहले तैनाती पाने वाले शिक्षकों को टीईटी से मुक्ति प्रदान करने की मांग कर रहे हैं।
दिबियापुर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीराम शुक्ला ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रकरण पर लाखों शिक्षकों में असंतोष व गंभीर मानसिक तनाव की स्थिति है। इसलिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए।
बोले शिक्षक, लड़ाई लड़ रहा संगठन
टेट से मिले मुक्ति
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ सुशील पांडेय गुट के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन तिवारी ने बताया कि समय बढ़ाने की बात शिक्षकों को कतई रास नहीं आई है। शिक्षक संघ शिक्षकों के हित के लिए लगातार लड़ाई लड़ रहा है। हर हाल में 2010 के पूर्व के शिक्षकों को टेट से मुक्ति प्रदान कराई जाए।
न्याय दिलाया जाएगा
प्राथमिक शिक्षक संघ औरैया के जिला मंत्री अरविंद राजपूत ने बताया कि फैसला जहां शिक्षकों के हित में नहीं है वहीं सरकार की मंशा शिक्षकों के प्रति अन्याय पूर्ण है। 2017 में जो संशोधन किया गया था, उसे आज तक सरकार ने नहीं खोला है। अब आर पार की लड़ाई होगी। शिक्षकों को न्याय दिलाया जाएगा।
फोटो-21- विपिन तिवारी। संवाद