श्रावण मास यानि एक माह का शिवभक्तों का त्योहार, भोले का त्योहार हो और उमंग न हो, ऐसा संभव नहीं है। ज्योतिर्लिंग की भांति ख्याति प्राप्त कालेश्वर मंदिर, सत्तेश्वर तालाब के समीप विराजे प्राचीन शिवालय के भोले बाबा सहित प्रसिद्ध शिव मंदिरों से छोटी काशी का रूप लिए औरैया भोले का स्वागत को आतुर है।
इस छोटी काशी में पूरे सावन माह जाप, शिवपुराण कथा, मेलों और भंडारों के आयोजनों से भोले का त्योहार मनाने की तैयारी की गई है।
शहर में श्रावण मास का त्योहार पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस माह में घरों में ओम नम: शिवाय तो शिवालयों में बम भोले के जयकारे गूंजते रहे हैं।
शनिवार से शुरू हो रहे सावन माह को भोले का त्योहार मानने के लिए शिव भक्त मन: वाच: और कर्मण: से तैयारियों में जुटे हुए हैं। शिवालयों को रंग-रोगन से चमका दिया गया है। शिव मंदिरों में नाना प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर जाप, शिवपुराण कथा, भंछारों ओर मेलों का आयोजन किया गया है।
ज्योतिर्लिंग की भांति ख्याति के लिए शहरी सीमा पर स्थित कालेश्वर मंदिर पर शिव दर्शन को विशेष इंतजाम किए गए हैं, यहां सीसीटीवी कैमरों के साथ भारी सुरक्षा बल को तैनात किया गया है। कांवरियों को सहूलियत प्रदान करने को यहां प्रबंध किए गए हैं। वहीं मंदिर परिसर को चमका दिया गया है।
तिलक नगर मोहल्ले में स्थित भगवान भूतेश्वर मंदिर पर श्रावण मास के लिए सजाया गया है। सत्तेश्वर मोहाल के प्राचीन शिवमंदिर की छठा ही देखते बन रही है। फूलमती मंदिर के पीछे शिवमंदिर को भी श्रावण मास के लिए सजाया गया है।
उक्त मंदिरों के अलावा आवास विकास की काली माता मंदिर, गौरैया तालाब के भोले बाबा मंदिर, संकट मोचन मंदिर में विराजे भोलेनाथ मंदिरों पर भोले का त्योाहर मानने की तैयारियां की गई हैं।