शौचालय के टूटे दरवाजे को हटाती टीम
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औरैया। ब्लाक सहार की ग्राम पंचायत भटौली में आधे अधूरे शौचालयों के निर्माण से ग्रामीणों के खुले में शौच जाने की मजबूरी दूर होती दिख रही है। ‘गांव ओडीएफ, फिर भी खुले में शौच जा रहे ग्रामीण’ शीर्षक से अमर उजाला में 17 फरवरी को प्रमुखता से खबर छपने के बाद डीपीआरओ कार्यालय के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। खबर का असर यह रहा कि आनन फानन में ग्रामीणों को समस्या से निजात दिलाने की योजना बनी। इसके बाद ग्राम प्रधान ने सोमवार को 20 शौचालयों के क्षतिग्रस्त दरवाजों को को बदलवाया।
ग्राम पंचायत भटौली में 30.32 लाख रुपये की लागत से 252 शौचालयों का निर्माण करवाकर ओडीएफ घोषित किया गया था। लेकिन आधा अधूरा निर्माण होने से गांव वालों को इन शौचालयों का लाभ नहीं मिल रहा था। इसके चलते लोग खुले में शौच जाने को मजबूर थे। गांव के शौचालयों की स्थिती देखी गई तो वहां हालत खराब नजर आए। मानक का ध्यान न दिए जाने के चलते बनाए गए शौचालयों के कहीं दरवाजे टूटे थे तो कहीं उनकी दीवारें जर्जर थीं। ग्रामीणों का आरोप था कि ठेकेदारी प्रथा के चलते शौचालयों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया।
अमर उजाला ने सोमवार को खबर छापी तो प्रधान व उनकी टीम शौचालयों का हाल देखने दौड़ पड़ी। प्रधान ने आनन-फानन में एक दिन में 20 शौचालयों के क्षतिग्रस्त दरवाजों को बदलवाया। शौचालयों के बदले जा रहे दरवाजों को देखकर शौचालय मालिकों और ग्रामीणों ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उधर, प्रधान पति शैलेंद्र यादव ने बताया कि हवा चलने के चलते टूटे शौचालयों के दरवाजों को दुरुस्त कराया जा रहा है। गांव में शौचालयों का निर्माण भी अभी अधूरा है, जिसे शीघ्र ही पूरा किया जाएगा।