आचार्य महाश्रमण ने प्रवचन के दौरान कहा कि जिंदगी में गंदगी को स्थान न दें। आचार्य जी शुक्रवार को अहिंसा यात्रा के अजीतमल से रवाना से पूर्व प्रात:कालीन प्रवचन कर रहे थे। अहिंसा यात्रा अजीतमल से चलकर ग्राम लखनपुर स्थित दिपाली रेस्टोरेंट पहुंची। क्षेत्रीय लोगाें ने यात्रा का स्वागत किया।
प्रवचन में आचार्य महाश्रमण जी ने बताया कि हमारे जीवन में विवेक का बड़ा ही महत्व है। विवेक धर्म है। अलग-अलग करके निर्णय करना क्या मेरा हित है, क्या अहित है, क्या करणीय है, क्या अकरणीय है। इस प्रकार विवेचना करना विवेक होता है।
उन्हाेेंने कहा कि हमें मानव जीवन मिला है। हम जिंदगी में गंदगी को स्थान न दें। जिंदगी में पवित्रता रहे, इसके लिए जिंदगी को सफल बनाने का प्रयास करें । इसके लिए विद्या, विनय का विकास करें। कहा कि जिससे विवेक अपने आप जागृत हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारे अंतर मन में झूठ का विचार न आए, चोरी की इच्छा भी न जागे। इसके लिए नैतिकता के मार्ग पर चलकर शक्ति को जगाने का प्रयास करें।
हम सभी प्राणियाें के प्रति मैत्री भाव रखें और दया भगवती हमारे दिल में विराजमान हो जाए। कार्यक्रम से पहले श्रीधर पांडेय ने पूजा- अर्चना कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार ने किया।