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क्लीन दीपावली, ग्रीन औरैया

Tue, 10 Nov 2015 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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देशी पटाखों की आतिशबाजी में आगे शहरवासियों ने दीपावली पर कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे फोड़ने का मन बना लिया है। तेज आवाज वाले देशी पटाखों के लिए मशहू्र फफूंद, पाता, खानपुर, बिधूना, एरवाकटरा, आयाना में देशी पटाखों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। देशी पटाखों से निकालने वाला धुंआ प्रदूषण फैलाता है। पर्यावरण के प्रति जागरूक जिले वासियों ने इस बार रोशनी के पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाए जाने की तैयारी की है।
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तेज आवाज है खतरनाक
शहर के बाल रोग विशेषज्ञ डा. अरुण तिवारी बताते है कि तेज आवाज के पटाखों से बच्चों के कान के पर्दे फट सकते हैं। मनुष्य के सुनने के लिए 60 डेसीबल तक की ध्वनि तीव्रता सही होती है। लेकिन तेज आवाज वाले पटाखों से 100 से अधिक डेसीबल की ध्वनि निकल रही है। इससे कान का पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है।

क्या है इको फ्रैंडली पटाखे
इको फ्रैडली पटाखों से कान, आंख और पर्यावरण सुरक्षित रहता है। कृषि वैज्ञानिक डा. जितेंद्र कुमार बताते हैं कि कोशिश करें की दीप जगाकर दीपावली की खुशियां मनाएं। कम के कम पटाखे फोड़ने का प्रयास करें। ऐसे पटाखों का इस्तेमाल करें। जिसने पेड़-पौधों को नुकसान न हो सके। वहीं नुमाइश मैदान में पटाखे की दुकान लगाए आतिशबाज आशीष कुमार बताते है कि अधिक ऊंचाई पर जाकर फटने वाले पटाखों से पूरा मजा आता है। रोशनी भी होती है, आवाज भी आती है और पर्यावरण भी कम प्रदूषित होता है।
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बच्चे खरीदें ईको फ्रैंडली पटाखे
दीपावली पर इस बार बाजार में ईको फ्रैंडली पटाखे उतारे गए है। आतिशबाज आशीष, शानू् बताते हैं कि उनकी दुकान में ब्रांडेड बैंड ब्वाय, गोल्ड क्वाइन, मस्त- मस्त, डब्लूटीओ, हाट गजला जैसे पटाखे है। यह दूर जाकर फूटते हैं। इन पटाखों की कीमत 110 रुपये से लेकर 420 रुपये तक है। इसके साथ ही खूब ऊपर जाकर फटने वाले पटाखों की वैरायटियां भी है। जिसमें गोल्ड गन मिसाइल, पाप म्यूजिक, वाइलेट, गोल्डन ट्रिपल आदि शामिल है।
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