राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर निर्माणाधीन सिक्स लेन परियोजना के तहत किसानों की अधिग्रहित भूमि पर सर्विस लेन का निर्माण कराने के बाद भी भू-विस्थापित किसान मुआवजे से वंचित हैं। मुआवजा भुगतान को लेकर जरुरी धारा थ्री डी के प्रकाशन में हो रही देरी इसका प्रमुख कारण है। जमीन गंवाने वाले किसानों ने जिला प्रशासन से मुआवजे का भुगतान कराने की गुहार लगाई है।
जिले के पूरब दिशा पर स्थित गांव पुरवा रहट से लेकर पश्चिम के सबसे अंतिम गांव अनंतराम के बीच 39 गांवों से होकर एनएचएआई ने सिक्स लेन परियोजना के तहत छह लेन सड़क का निर्माण कराया है। इन गांवों से निकले हाइवे के दोनों ओर सर्विस लेन का निर्माण अंतिम दौर में है। सर्विस लेन निर्माण के लिए भूमि जुटाने के लिए एनएचएआई ने 26 जून 2015 को धारा थ्री ए का प्रकाशन किया था। इसके बाद कार्यदायी संस्था ओरिएंटल स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग(ओएसइ) ने सर्विस लेन बना दी।
लेकिन किसानों के मुआवजे को लेकर चुप्पी साध ली। एनएचआई ने भी मुआवजा भुगतान प्रक्रिया के जरूरी धारा थ्री डी का प्रकाशन ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे जमीन गंवाने वाले गांव चिरुहूली, मिहौली, करमपुर, जगतपुर, दलेलनगर, पूठा, जगदीशपुर, इमलिया, बाबरपुर गांव, मोहारी, सोनासी, अनंतराम आदि गांवों के किसान मुआवजे के लिए परेशान हैं। उन्होंने एनएचएआई पर जान-बूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। भू-विस्थापित किसान सुरेश कठेरिया, चंद्र प्रकाश, विमला देवी, राजेंदी देवी, सूबेदार सिंह, राधेश्याम, पुष्पा देवी, राजेश कुमार, जगदीश कुमार आदि ने एडीएम से मुआवजे का भुगतान कराने की गुहार लगाई है।
भू-विस्थापितों के मुआवजे को लेकर धारा थ्री डी के प्रकाशन की तैयारी की जा रही है। कानपुर नगर और कानपुर देहात जनपदों में इसका प्रकाशन करा दिया गया है। जल्द ही इटावा और औरैया जनपदों में भी धारा थ्री डी प्रकाशित कराई जाएगी।
नवीन कुमार मिश्रा, क्षेत्रीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई, कानपुर