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डायरिया के मरीज बढ़े, पर नहीं पहुंची स्वास्थ्य टीम

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गांव में बीमार पड़े बच्चे। संवाद - फोटो : AURAIYA
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बेला। संक्रामक रोग और फैली बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना संजीदा इसका अंदाजा पुर्वा दूजे में बीमार लोगों को देख कर लगाया जा सकता है। गांव में डायरिया से दो बच्चों की मौत और कई लोगों के बीमार होने के बाद भी दो दिन से स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची। कुछ लोग अपनों का इलाज कराने के लिए कानपुर व निजी अस्पतालों में चले गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के रवैये से ग्रामीणों में आक्रोश है।
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पुर्वा दूजे में राजकमल के पुत्र मनीष(4) व राजवीर के पुत्र ललित(8) की डायरिया से शुक्रवार को मौत हो गई थी। शनिवार को सीएमओ स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंची।ं इलाज और सफाई सफाई के साथ दवा छिड़काव का भरोसा दिलाया। इतना ही नहीं गांव में दो दिन तक स्वास्थ्य टीम के कैंप करने, निगरानी समिति के बीमार मरीजों के चिह्नित करने के निर्देश दिए।
दो दिन बीतने के बाद न तो सीएमओ ने गांव में फैली बीमारी पर ध्यान दिया न ही उनके डाक्टर व अफसरों ने। हालात ये हं कि गांव में गंगाधर (80), शिवा (12), खुशी (3), अनिकेत(4), रैना(10), दीक्षा (8), प्रियंका (35) समेत कई लोग बीमारी से पड़े कराह रहे हैं। दोपहर बाद हालत बिगडने पर शिवा (12), रैना (10) व दीक्षा(8) को कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि बीमार लोगों के पास न तो दवाहै और न ही ओआरएस घोल। जिससे लोग चारपाई पर पड़े कराह रहे और स्वास्थ्य सुविधा को कोसते नजर आए। इसके अलावा गांव में सफाई के नाम पर खानापूर्ति की गई। गांव में नालियों से सिल्ट निकाल कर किनारे डंप कर दी गई। इधर सोमवार सुबह आंधी और बारिश होने से गंदगी चारों तरफ फैल गई। इसको लेकर ग्रामीणों ने रोष जताया और अफसरों पर लापरवाही बरते जाने के आरोप लगाए।
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि गांव में टीम भेजने के निर्देश दिए गए थे, टीम क्यों नहीं पहुंची, इसकी जानकारी की जा रही है। आशा व आंगनबाड़ी को बीमार लोगों का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
एक हैंडपंप पर निर्भर आठ सौ की आबादी
गांव के कुछ हैंडपंप खराब है, अधिकांश लोग एक कुएं का पानी पी रहे थे। गांव पहुंचीं सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कुएं का पानी पीने से मना कर दिया था। खराब पड़े हैंडपंप रीबोर कराने के लिए प्रधान से कहा गया। साथ ही कुएं में दवा डलवाने के निर्देश दिए गए, पर आज तक समस्या जस की जस बनी है। गांव में आठ सौ की आबादी पर एक हैंडपंप है, जिससे लोग पानी पीने को मजबूर हैं।

चारपाई पर बीमार पड़े गंगाधर। संवाद- फोटो : AURAIYA

गंदगी के बीच लगे हैंडपंप से पानी भरती महिला। संवाद- फोटो : AURAIYA

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