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Auraiya News: 200 करोड़ के जमीन घोटाले में तारीख पे तारीख

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औरैया। दामिनी फिल्म का मशहूर डायलॉग ‘तारीख पे तारीख’ इन दिनों सदर तहसील की एसडीएम कोर्ट में दायर जमीन के फर्जीवाड़े वाद में एकदम फिट बैठ रहा है।
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यहां पर 200 करोड़ के जमीन घोटाले की वाद सुनवाई में तारीख पर तारीख दी जा रही है। आदेश के इंतजार में 35 तारीखें लग चुकी हैं, जबकि यह घोटाला खुद सरकारी अमले ने ही जांच में पकड़ा था। फिर भी फैसला सुनाने में लंबा वक्त लग रहा है। ये फैसला आने में देरी के पीछे जिम्मेदार कुछ बोल ही नहीं रहे हैं, लेकिन जानकारों की माने तो यह फैसला अगले माह आ सकता है।
31 जुलाई 2024 को डीएम के आदेश पर सदर तहसील की एसडीएम की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय टीम ने ककराही, वैसुंधरा, जमुहां, जमूही, कैंजरी व लखनापुर आदि पंचायतों में जमीन के फर्जीवाड़े की जांच की थी। इसमें ककराही मौजा में 200 करोड़ कीमत वाली औरैया-दिबियापुर रोड किनारे की साढ़े सात एकड़ जमीन को फर्जी तरीके से हथियाने का मामला पकड़ा गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर 24 अगस्त 2024 को सदर तहसील में ही एसडीएम कोर्ट में वाद दर्ज कराया गया था। मामले में नोटिस जारी होने के साथ सुनवाई शुरू हुई थी। एक माह में चार-चार तारीखें। साक्ष्यों के साथ सरकारी अमला और विपक्ष के बीच तारीखों का दौर इस कदर लंबा हो गया कि 35 तारीखें हो चुकी हैं।
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आदेश का इंतजार लंबा होता जा रहा है, जबकि इस मामले में सदर तहसील प्रशासन ने जांच रिपोर्ट तैयार की थी। इसके बावजूद आदेश के इंतजार में तारीख पर तारीख का दौर जारी है। इस जमीन पर करोड़ों के प्लॉट बेचे जा चुके हैं। बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं। जानकारों की मानें तो देरी से आदेश आने पर इस जमीन पर कुछ लोगों के फर्जीवाड़े से कई लोग प्रभावित होंगे। दोषियों को मुकाम तक पहुंचाने और बेदखली जैसी कार्रवाई के लिए देरी होने पर राह और कठिन हो सकती है।

बोले जिम्मेदार-
ककराही मौजा की साढ़े सात एकड़ जमीन मामले में वाद की सुनवाई चल रही है। अगले माह इस मामले में फैसला आ जाएगा। विधिवत तारीखें लग रही हैं। -राकेश कुमार, एसडीएम सदर
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क्या था मामला:::
डीएम के आदेश पर गठित सदर तहसील की एसडीएम की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय टीम ने ककराही मौजा की साढ़े सात एकड़ जमीन का फर्जीवाड़ा पकड़ा था। जांच रिपोर्ट में सत्य नारायन व अरविंद कुमार ऊसर की साढ़े सात एकड़ जमीन पर फर्जी प्रविष्टि के सहारे काबिज हो गए थे। पट्टा आवंटन की फर्जी प्रविष्टि दर्शाकर साढ़े सात एकड़ जमीन हथिया ली गई थी, जबकि एक पात्र को अधिकतम 3.125 एकड़ पट्टा दिया जा सकता है। जांच टीम को पट्टा आवंटन की पत्रावली भी नहीं मिली थी। मामले में तत्कालीन लेखपाल को प्राथमिक जांच में दोषी माना गया था। सरकारी जमीन को क्षति पहुंचाने की बात सामने आई थी।

जमीन पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग, चल रहा पेट्रोल पंप
दिबियापुर-औरैया मार्ग पर कस्बा से सटी इस साढ़े सात एकड़ जमीन पर कई बिल्डिंगें बन गई हैं। राजस्व जानकारों की मानें तो यहां पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की गई है। हथियाई गई जमीन पर भूमाफियाओं ने करोड़ों कमाए। जाने-अनजाने लोगों ने प्लॉट खरीदे। बिल्डिंगें बन गईं। चंद लोगों का फर्जीवाड़ा कई लोगों को मुसीबत में डाल चुका है। खास बात यह है कि इस जमीन पर पेट्रोल पंप भी चल रहा है। एक बिल्डिंग में बैंक संचालित है।

75 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर चल रहा भाव
ककराही मौजा में दिबियापुर-औरैया रोड किनारे जमीन के भाव आसमान छू रहे हैं। प्लॉटिंग कारोबारियों की मानें तो कस्बा से सटी इस जमीन का बाजार भाव 75 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर चल रहा है। साढ़े सात एकड़ जमीन के लिहाज से तकरीबन 30 हजार वर्ग मीटर का दायरा है। ऐसे में इस जमीन की कीमत 200 करोड़ आंकी जा रही है।
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वाद सुनवाई की बढ़ाएं रफ्तार, निस्तारित हो मामले
राजस्व वादों को लेकर डीएम की समीक्षा बैठक में वाद निस्तारण पर जोर दिया जाता है। खासतौर पर गलत तरीके से जमीन हथियाने के मामलों में जल्दी निस्तारण के निर्देश हैं। इसके बावजूद ककराही मौजा की इस बेशकीमती जमीन के मामले में तहसील का अमला बैकफुट पर नजर आ रहा है। खास बात यह है कि सरकारी तंत्र ने ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ा था। मामले में तेजी से निस्तारण की जगह इंतजार का दौर जारी है।
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