संवाद न्यूज एजेंसी
दिबियापुर। चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष के शुरूआत पर मंगलवार को गांव गहेसर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ महामाई मंदिर पर आस्थावानों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंगलवार से शुरू हुई चैत्र नवरात्र के अवसर पर क्षेत्रीय आस्थावानों ने गहेसर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ महामाई मंदिर पर यहां स्थापित नौ देवियों के दर्शन किए।
काफी संख्या में आस्थावानों ने पहले ही दिन कन्या भोज कराया। आस्थावानों के अनुसार महामाई मंदिर में स्थापित माता महामाई के साथ ज्वाला और गमा देवी के साथ नौ देवियों के दर्शन करने के लिए आस्थावान नौ दिनों तक उमड़ेंगे। मान्यता है कि श्रृद्धा से शीश झुकाने वालों की मन मांगी मुरादें पूरी होतीं हैं।
बताया कि 1194 ईस्वी में मुहम्मद गोरी की सेना ने गहेसर स्थित महामाई मंदिर सहित यहां बसी आबादी को उजाड़ कर सैकड़ों वर्ष पुरानी धार्मिक संस्कृति को नष्ट कर दिया था। नष्ट होने के लगभग तीन सौ वर्ष बाद कन्नौज के राजा सदन सिंह ने 15 वीं शताब्दी में महामाई मंदिर का निर्माण कराया था।
यहां जिला प्रशासन ने परिक्रमा मार्ग भी बनवाया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बैटल आफ हरचंदपुर में शहीद हुए क्रांतिकारियों की याद में शहीद स्मारक भी बनवाया गया है। किंवदंतियों के अनुसार आल्हा खंड काव्य में गांव गहेसर ढिंग कन्हों, मठिया बनी शारदे माय .. के रूप में इस मंदिर का वर्णन मिलता है। इधर, मंगलवार को पहुंचे सीओ महेंद्र प्रताप सिंह एवं दिबियापुर थाना के प्रभारी निरीक्षक मुकेश बाबू चौहान ने मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुकेश बाबू चौहान ने बताया कि बड़े वाहनों को मंदिर की ओर जाने से रोक दिया गया है।