अपर सत्र न्यायाधीश महफूज अली ने थाना अजीतमल क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग को भगा ले जाने और बलात्कार करने के आरोपी भागीरथ को 10 साल कैद और 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही उसका सहयोग करने वाले पिता व भाई को भी सात-सात कैद की सजा से दंडित किया गया है।
अभियोजन के अनुसार ग्राम भदसान निवासी ने अजीतमल थाने में रिपोर्ट लिखाई थी कि 13 मई 2013 को उसकी 13 वर्षीय पुत्री घर में अकेली थी। तभी गांव निवासी भागीरथ पुत्र राम सेवक उसे यह कहकर घर से ले गया कि खेत में तुम्हारे पिता की तबियत खराब है। खेत पर पानी मंगा रहे हैं। पानी लेकर चलो। बाद में भागीरथ पीड़िता को बहला-फुसलाकर लखनऊ भगा ले गया। भागीरथ की शादी उसकी पुत्री से राम सेवक और छुन्ना ने जबरन करवा दी। भागीरथ पीड़िता के साथ करीब डेढ़ माह तक उसकी इच्छा के विरूद्ध बलात्कार करता रहा।
रिपोर्ट लिखाने के एक माह बाद पुलिस ने पीड़िता को भागीरथ, उसके पिता राम सेवक और भाई छुन्ना को बरामद किया। यह मामला पाक्सो एक्ट की धाराओं का आरोप पत्र लगने के बाद विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम महफूज अली की कोर्ट में चला। अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे महफूज अली ने तीनों अभियुक्तों को दोषी माना। साथ ही लड़की को भगाने वाले मुख्य आरोपी भागीरथ को 10 साल की कैद और 22 हजार रुपए अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
जबकि सहयोग करने वाले पिता राम सेवक और भाई छुन्ना को सात-सात साल कैद के साथ एक-एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सत्र लिपिक भूपेश मिश्रा ने बताया कि अभियुक्तों के अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। तीनों अभियुक्तों को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।