आठ साल पहले अछल्दा से अगवा हुए बालक की हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश अंगद प्रसाद ने चार लोगों को उम्र कैद व 40-40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने जुर्माने की राशि में से 80 फीसदी धनराशि मृतक बालक के पिता सदन सिंह को देने के निर्देश दिए।
अभियोजन के अनुसार वादी जखा गुनौली निवासी सदन सिंह ने बताया कि वह अपने नाबालिग बालक लालाराम उर्फ आननंद कुमार को 1 सितम्बर 2008 को दवा दिलाने अछल्दा आया था। दवा दिलाकर वह बेटे को लेकर घर जा रहा था। तभी शाम 6:30 बजे उसके गांव का अवनीश कुमार शाक्य अपने भाई पिन्टू व परिवार के आनंद कुमार व राजू नेता उर्फ मोहित अपने पिता के साथ पुराना अछल्दा में मिले। उन्होंने कहा कि तुम अपने बेटे को हमारे पास छोड़ दो हम ट्रक से उसे घर पहुंचा देंगे।
सदन सिंह ने बताया कि उसे आटा की बोरी लेकर घर जाना था इसलिए उसने अपने बेटे को अवनीश व उसके साथियों के पास छोड़ दिया। इसके बाद जब उनका बेटा घर नहीं आया तो उन्होंने तलाश की। तलाश में उन्हें पता चला कि प्रधानी चुनाव की रंजिश मानते हुए इन लोगों ने बेटे को गायब कर दिया है। 9 सितम्बर को बालक का शव मिला। पुलिस ने चारों आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया। यह मुकदमा एडीजे अंगद प्रसाद के यहां चल रहा था।
अभियोजन की ओर से वकील आनंद दुबे व एडीजीसी संजय कुमार श्रीवास्तव ने एक अव्यस्क बालक को अपहृत कर उसकी हत्या करने व साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाकर कड़ी से कड़ी सजा देने की अपील की। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद एडीजे अंगद प्रसाद ने चारों अभियुक्त अवनीश कुमार शाक्य, पिंटू उर्फ श्याम प्रताप, आनंद कुमार एवं मोहित कुमार उर्फ राजू नेता को अपहरण व हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई।