गलत नीयत से लड़की का हाथ पकड़ने वाले युवक को अपर सत्र न्यायालय से चार साल कैद की सजा सुनाई। वहीं उसके पिता को समर्थन करने और लड़की को पीटने के जुर्म में ढाई साल की सजा सुनाई। मामला बेला थाना क्षेत्र का है।
बेला थाने में पीड़ित की बहन शशिप्रभा ने रिपोर्ट लिखाई थी कि पांच फरवरी 2014 की शाम वह अपनी 17 वर्षीय बहन के साथ मेडिकल स्टोर जा रही थी। तभी उसके घर के पास रहने वाले नीतू पुत्र रामदास ने उसकी बहन का गलत नीयत से हाथ पकड़ा। बहन ने विरोध किया तो उसकी मां सियादुलारी ने उसे बचाया। तभी नीतू के पिता रामदास भी मौके पर आ गए। उन्होंने नीतू का समर्थन किया। वह बहन को पीटने हुए अपने घर ले गया। जहां उसे बंद कर दिया। बहन के चिल्लाने पर गांव के अन्य लोगों ने उसे बचाया। मामले में पुलिस ने विवेचना कर नीतू व उसके पिता रामदास के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामला एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश महफूल अली ने आरोपी नीतू को धारा आठ पाक्सो एक्ट में चार वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। उसके पिता रामदास को धारा 18 पाक्सो एक्ट में ढाई साल कैद और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंड़ित किया। सत्र लिपिक भूपेश कुमार ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
साथी पर मुकदमा होने पर वकीलों में नाराजगी
साथी अधिवक्ता अनिल कुमार गौर के विरुद्ध थाना जसवंत नगर इटावा में एसआईटी ने मुकदमा दर्ज कराने के विरोध में शुक्रवार को जिला बार एसोसिएशन ने विरोध दिवस मनाया। उन्होंने मुकदमा वापस लेने की मांग की। डीबीए अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह भदौरिया, महामंत्री संजीव कुमार चतुर्वेदी के संचालन में हुई बैठक में अधिवक्ता गौर के विरुद्ध बिना निष्पक्ष जांच के जल्दबाजी में मुकदमा दर्ज करने की निंदा की गई। डीबीए के अश्वनी कुमार शुक्ला, सुनील दुबे, अशोक अवस्थी, महावीर शर्मा, अरुण चतुर्वेदी, शिवम शर्मा, अरविंद राजपूत, अशोक अवस्थी आदि ने निंदा की। इधर वकील न्यायिक कार्य से विरत रहे।