वीआईपी ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सिपाही का शव
सोमवार की शाम अजीतमल कस्बा पहुंचा। शव के अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय
लोगों की भीड़ लग गई। सिपाही की मौत से परिजन रो-रोकर बेहाल हो गए।
20
सितंबर को ललितपुर में वीआईपी ड्यूटी से लौटते समय एक ढाबे पर गोली चल
जाने से सिपाही अरुण यादव पुत्र लक्ष्मीनारायण यादव की मौत हो गई थी।
सिपाही कानपुर नगर के सीओ जगदीश सिंह का हमराही था।
सोमवार की शाम
अरुण का शव बाबरपुर नगर पंचायत के विद्या नगर मोहल्ले पहुंचा। यहां पहले से
ही सैकड़ों लोगों की भीड़ मौजूद थी। शव आते देख सभी दौड़ पड़े। पैैैैतृक
घर में कोहराम मच गया। देर रात तक मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाने वालों
की भीड़ लगी रही।
पूर्व सैनिक लक्ष्मीनारायण के छोटे पुत्र अरुण को
पिता की तरह देश की सेवा करने का जज्बा था। अपनी मेहनत और लगन के बल पर
अरुण ने झांसी में हुई भर्ती परीक्षा पास की। वर्ष 2011 में वह पुलिस भर्ती
में शामिल हो गया। अभी कुछ माह पूर्व ही वह स्थानांतरित होकर कानपुर नगर
आया था।
अरुण ने अपने चार साल के छोटे से कैरियर में अधिकारियों पर
अपनी कार्यशैली की छाप छोड़ दी थी। अरुण के जाने से अब पत्नी संगीता को
मासूम हैप्पी की परवरिश की चिंता सता रही है। मासूम हैप्पी को अभी यह नहीं
मालूम कि उसके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है। मां की गोद में
लिपटा हैप्पी बस मां को रोता निहार रहा था।