उरई। कुठौंद के एक गांव में रहने वाली इंटर की छात्रा के साथ 9 अगस्त की रात पड़ोसी युवकों ने जो हैवानियत की थी, उसके बाद से छात्रा अपने घर ही नहीं बल्कि गांव की गलियों से खौफ खाने लगी थी। यही वजह थी कि झांसी में इलाज के दो दिन बाद छात्रा जब कोर्ट में बयान देने आई तो फिर इसके बाद वह अपने गांव लौटने को तैयार नहीं थी। इस कारण परिजनों ने उसे कानपुर के बर्रा स्थित तात्याटोपे नगर में रिश्तेदार के घर भेज दिया था।
करीबियों के मुताबिक वह हर वक्त परिजनों से बस यही कहती थी कि कहीं भी ले जाओ पर गांव नहीं जाएगी। मजबूरन घरवालों ने छात्रा को कानपुर रिश्तेदार के घर भेजने का फैसला किया। क्या मालूम था कि वह वहां पर भी अपने साथ हुई घटना को भुला नहीं पाएगी और नदी में छलांग लगा देगी। छात्रा के परिवार के करीबी लोगों की मानें तो दरिंदगी की घटना इस हद तक छात्रा के दिलो दिमाग पर छा गई थी, उसे अपना जीना भी गंवारा नहीं लग रहा था।
बेबस पिता अक्सर यही कहता था कि बेटी के साथ पूरा परिवार ही घुट घुट कर जी रहा है। इस बारे में कुठौंद थाना प्रभारी सुनील तिवारी ने बताया कि 13 अगस्त को छात्रा कोर्ट में बयान देने के लिए आई थी, इसके बाद ही परिजनों ने उसे कानपुर किसी रिश्तेदार के घर भेज दिया था। वहां क्या हुआ फिलहाल इसकी कोई जानकारी अभी तक कानपुर से नहीं मिली है। फिलहाल गांव वालों को भी जबसे घटना की जानकारी हुई है, सभी स्तब्ध हैं।
छात्रा के साथ पूरा परिवार भी घुट-घुट कर जी रहा था
अमर उजाला ब्यूरो