फोटो 03एयूआरपी 47- रेलवे ट्रैक पर घटना के सीन रीक्रिएट करती विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की टीम
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दिबियापुर (औरैया)। बीमा अभिकर्ता मनोज दुबे का क्षत-विक्षत शव रेलवे ट्रैक पर मिलने के मामले में खुलासे से दूर पुलिस की सहायता के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की टीम ने घटनास्थल पर पड़ताल की। विभिन्न पहलुओं पर जांच कर मामले की तह में जाने का प्रयास किया।
गत 24 अगस्त की सुबह मनोज दुबे बाइक समेत गायब हो गए थे। 28 अगस्त को शव गांव कन्हों के पास रेल ट्रैक पर मिला था। मृतक के पिता रामबाबू ने अज्ञात के खिलाफ हत्या कर शव फेंके जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस के हाथ केंजरी रेलवे क्रासिंग पर लगे सीसीटीवी के फुटेज हाथ आए थे। इसमें 28 अगस्त की सुबह 7.56 बजे मनोज दुबे बाइक से अकेले घेरा होते हुए दिबियापुर की ओर जाते दिखे।
जबकि 8 बजकर 12 मिनट पर क्रासिंग पार कर घेरा से केंजरी गांव की ओर आते दिखे थे। इस मामले में जिले की पुलिस टीम एक माह से अधिक समय से अंधेरे में ही हाथ-पैर मार रही है। पुलिस टीमें अभी तक यह भी पता नहीं लगा पाई कि आखिरकार गायब होने के दिन से लेकर शव मिलने वाले दिन तक मृतक मनोज दुबे कहां रहे।
शनिवार दोपहर विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के एसके मौर्या एवं अरुण शुक्ला की टीम ने दिबियापुर थाने के क्राइम इंस्पेक्टर सुनील कुमार वर्मा, उपनिरीक्षक ज्ञानेंद्र कुमार एवं जिले की फारेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही केंजरी क्रासिंग पर पहुंचकर यहां लगे सीसीटीवी के बारे में भी पड़ताल की।