दिबियापुर (औरैया)। दस दिन के भीतर हरचंदपुर के दो लोगों को पुलिस द्वारा पकड़कर दोबारा शांतिभंग में पाबंद करने की सूचना पर आक्रोशित लोगों ने दिबियापुर थाने का घेराव किया। भीड़ में शामिल लोगों ने कहा कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत यह कार्रवाई की गई है। हालांकि, बाद में शांतिभंग में पाबंद किए गए दोनों लोगों को एसडीएम बिधूना ने जेल भेज दिया।
जिला पंचायत सदस्य शरद राना के साथ ग्राम हरचंदपुर के लोग खासी संख्या में दिबियापुर थाने पहुंचे। शरद राना के अनुसार ग्राम हरचंदपुर के सुंदर सिंह पुत्र मंगल सिंह व त्रिभुवन सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह को मंगलवार की रात लगभग 11.30 बजे पुलिस ने गिरफ्तार किया। वह भी पुलिस, पड़ोसी की छतों से दोनों के घरों के अंदर दाखिल हुए। बुधवार को सुबह दिबियापुर थाने में मौजूद पुलिस बल से जिला पंचायत सदस्य ने पूछा कि आखिरकार रात के अंधेरे में दोनों लोगों को क्यों गिरफ्तार किया गया। दोनों लोगों ने ऐसा क्या अपराध किया जो उन दोनों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
शरद राना के अनुसार, पिछले दिनों ग्राम प्रधान हरचंदपुर से विवाद के बाद इन्हीं दोनों लोगों को पिछले सप्ताह भी शांतिभंग में पाबंद किया गया था। बाद में यह दोनों लोग ग्वालियर चले गए थे। मंगलवार की शाम को ही ग्वालियर से वापस आने पर दोनों को दोबारा पकड़ लिया गया। थाने में खासी भीड़ जमा होने की सूचना पर एएसपी भी दिबियापुर थाने पहुंच गए। बाद में दोनों लोगों को एसडीएम बिधूना ने शांतिभंग में इटावा जेल भेज दिया। शरद राना ने आरोप लगाया कि राजनैतिक षड्यंत्र के तहत उनके क्षेत्र के लोगों को परेशान किया जा रहा है। अगले दो दिनों में वह लोग मुख्यमंत्री के जनता दरबार में मामले को रखने के लिए पहुंचेंगे।
इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार शुक्ला का कहना है कि पिछले दिनों हरचंदपुर प्रधान और उनके पति के साथ मारपीट का मामला हुआ था। गांव में तनाव होने के कारण मामले में दोबारा शांतिभंग होने की आशंका जताई गई थी। हरचंदपुर के लोग शांतिभंग में पाबंद किए गए लोगों से मिलने आए थे। हंगामे जैसी कोई स्थिति पैदा नहीं हुई। बता दें कि 8 सितंबर को तड़के टहलने जा रहीं प्रधान सुषमा दुबे व उनके पति राजू दुबे ने दो लोगों के खिलाफ मारपीट व फायरिंग कर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच में फायरिंग की घटना गलत पाई थी। इसके बाद दोनों आरोपियों को शांतिभंग में पाबंद कर एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया था।