कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा पर वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में किसानों को उन्नतिशील बनाने और अधिक जागरूक करने पर रणनीति बनी।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के प्रधान वैज्ञानिक डा. एसके सिंह ने गेहूं की फसल कटाई के उपरांत कम अवधि की मूंग बुवाई पर बल दिया।
कहा कि गेहूं के किसानों को यह अतिरिक्त लाभ दे सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी औरैया डा. एके कुलश्रेष्ठ ने सरकार द्वारा चलाई जा रही 25 जानवरों की माइक्रो कामधेनु योजना के बारे में बताते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के कृषकों से इसे अपनाने पर बल दिया।
उप कृषि निदेशक डा. बनारसी दास यादव ने मृदा परीक्षण अभियान को साथ में चलाने के लिए कहा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी के निदेशक डा. यूएस गौतम ने केंद्र पर आईएफएस यूनिट देने की बात कही। कहा कि केंद्र को और बेहतर कार्य करना चाहिए।
कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के उन्नतिशील किसानों को आईसीएआर अवार्ड दिलाएं ताकि किसानों को और अधिक जागरूक किया जा सके। केंद्र अध्यक्ष गुरु सेवक सिंह ढिल्लो ने आश्वस्त किया कि केंद्र कृषक हित में अच्छे से अच्छा कार्य करता रहेगा।
अंत में सभी सदस्यों ने प्रक्षेत्र परिसर में लगी इकाइयों का भ्रमण किया। केंद्र प्रभारी डा. अनंत कुमार ने वर्ष 2014-15 की प्रगति आख्या रखी। वर्ष 2015-16 की कार्ययोजना विस्तार से बताई। शस्य विज्ञान विशेषज्ञ, पशुपालन, उद्यान, गृह विज्ञान विशेषज्ञों ने अपने- अपने विषयों की प्रगति आख्या एवं कार्य योजना प्रस्तुत की।
केंद्र के मुख्य सलाहकार डा.धर्म सिंह, जनता महाविद्यालय अजीतमल के डा. बीएस भदौरिया, डा. संजीव कुमार, आरके श्रीवास्तव, डा. सुरजीत सचान, डा. आरके चौरसिया समेत जिले के प्रगतिशील कृषक, युवक मौजूद रहे।