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कोरोना महामारी ने अकेले झूला झूलने को किया मजबूर

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दिबियापुर (औरैया)। कोरोना संक्रमण के भय से इस बार सावन में गांवों में पहले वाली चहलपहल नहीं दिखी, पेड़ों पर झूले भी इक्का दुक्का ही दिख रहे हैं। ऐसे में झूला झूलने का शौक पूरा करने के लिए युवतियां अकेले ही झूला झूलने को मजबूर हैं। कोरोना के डर से इस बार ज्यादातर महिलाएं भी मायके नहीं जा रही हैं।
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सावन शुरू होते ही हर साल बेटियां मायके आती रही हैं, जिससे चहलपहल बढ़ जाती थी। पेड़ों व घर आंगन में झूले पड़ जाते थे। कजरी व अन्य लोकगीत गूंजने लगते थे। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के भय से बीते साल वाला नजारा नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि वैश्विक महामारी के कारण इस बार कम विवाहिताएं मायके आई हैं। इसके साथ ही गांवों में अब पुराना माहौल भी नहीं रहा। केवल रक्षाबंधन के दिन ही पेड़ों एवं घर के आंगन में झूला डालकर भुजरियों को झुलाने की पुरानी परंपराओं को पूरा किया जाता है।
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