फफूंद। क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाता का ममरेजपुर साधन सहकारी समिति भवन निर्माण ढाई वर्षों से अधूरा पड़ा है। जिसके चलते समिति का संचालन जर्जर सामुदायिक केंद्र से किया जा रहा है। वहीं से किसानों को खाद और डीएपी दी जा रही है।
ममरेजपुर साधन सहकारी समिति में लगभग 600 किसान सदस्य हैं, जो खेती के लिए समिति से खाद खरीदते हैं। सामुदायिक केंद्र में संचालित समिति द्वारा तीन वर्ष पूर्व 20 लाख की लागत से भवन निर्माण शुरू हुआ था। कार्यदाई संस्था ने छह माह में भवन बनाकर तैयार कर दिया था, साथ ही अनाज क्रय चबूतरा और टीन शेड का भी काम पूरा हो चुका था, लेकिन कमरों के दरवाजे, गेट,शटर, फर्श में मिट्टी भराव और फर्श की आरसीसी व प्लास्टर का काम होना बाकी था। अचानक कार्यदाई संस्था ने काम बंद कर दिया, जिससे पिछले करीब ढाई वर्षो से भवन अधूरा पड़ा है।
निर्माणाधीन भवन की कोई देखरेख नहीं होने से अनाज क्रय चबूतरा और टीन शेड भी उखड़ गया है। साधन सहकारी समिति को वहां से तीन किलोमीटर दूर ममरेजपुर गांव के जर्जर सामुदायिक केंद्र में संचालित किया जा रहा है। जिससे यूरिया, डीएपी आदि लेने आने वाले किसानों को लंबा चक्कर काटकर आना पड़ता है। भवन निर्माण में हो रही लापरवाही से किसानों में नाराजगी व्याप्त है। सदस्य किसान बलराम सिंह, राजेंद्र सिंह, ब्रज बिहारी, राजेश, सुरेंद्र, रामसेवक ने बताया की 20 वर्ष पहले साधन सहकारी समिति की नए भवन का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया। अगर जल्द ही निर्माण पूरा नहीं हुआ तो किसान धरना देंगे।
बोले जिम्मेदार -
साधन सहकारी समिति के सचिव मुनेश्वर सिंह ने बताया की भवन का 20 लाख एस्टीमेट था। जिसमें केंद्र सरकार द्वारा किस्तों में 16 लाख रुपये मंजूर हुए थे। प्रदेश सरकार से चार लाख का अनुदान मिलना था, लेकिन वो कार्यदाई संस्था को नहीं मिला और ठेकेदार काम छोड़ कर चला गया। इससे भवन का निर्माण अधूरा पड़ा है। इसकी जानकारी सहायक निबंधक सहकारिता को दे दी गई है।