एरवाकटरा में ट्रैक्टर-ट्रॉली में ईंटें लादकर जाता चालक।
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औरैया। परिवहन विभाग में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का पंजीकरण कृषि कार्य के लिए करवाकर उनका धड़ल्ले से व्यावसायिक प्रयोग किया जा रहा है। ईंट भट्ठों से लेकर भवन निर्माण सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का प्रयोग हो रहा है। विभाग में महज 93 ट्रॉली पंजीकृत हैं जबकि जनपद में 10 हजार से अधिक ट्रैक्टरों में ट्रॉलियों का प्रयोग हो रहा है। कई बार हादसे होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पूर्व प्रधान मंत्री चौ. चरण सिंह ने किसानों को सहूलियत देने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली का पंजीकरण शुरू किया था। ट्रॉली बनाने के नियम भी थे लेकिन नियमों को ताक पर रखकर लोग अपने हिसाब से ट्रॉली का निर्माण कराकर व्यावसायिक प्रयोग कर रहे हैं। व्यावसायिक प्रयोग करने के लिए एआरटीओ में पंजीकरण अनिवार्य था। जनपद में 10 हजार से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली का प्रयोग व्यावसायिक क्षेत्र में किया जा रहा है। वहीं, जिले के उपसंभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में सिर्फ 15999 ट्रैक्टर और 93 ट्रॉलियां ही पंजीकृत हैं।
इसके अलावा जनपद में अवैध रूप से ट्रॉली को ट्रैक्टर में लगाकर ईंट भट्ठे और खनन कार्य में प्रयोग हो रहा है। शासन ने करीब आठ माह पहले ट्रॉली का पंजीकरण करने करने से बंद कर दिया गया था। इसके बाद लोग ट्रैक्टर खरीदने के बाद ट्रॉली बनवाकर प्रयोग कर रहे हैं।
व्यावसायिक प्रयोग के साथ ही ट्रैक्टर-ट्राली का उपयोग लोग सवारियां ढोने में भी करते हैं। प्रमुख पर्वाें पर होने वाले स्नान व अन्य आयोजनों में ट्रैक्टर-ट्राॅली में सवार होकर लोग जाते हैं। कई बार इस दौरान होने वाले हादसों में लोगों की जान भी चली जाती है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार कोई ध्यान नहीं देते हैं।
ट्रैक्टर में गलत तरीके ट्रॉलियां लगाकर व्यावसायिक प्रयोग करने वालों के खिलाफ जल्द अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - एनसी शर्मा, एआरटीओ