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Auraiya News: कनिष्क से लेकर कुषाण काल के सिक्के सजो रहे औरैया का पुरातन इतिहास

Mon, 20 Oct 2025 07:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-20एयूआरपी01- बूढादाना में मिला सूरी वंश का सिक्का। संवाद
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औरैया। कोई गांव, शहर, कस्बा या जिला कितना पुराना है। यह इतिहास में झांकने वाला है। उन स्थानों पर मिलने वाली पुरातनसामग्री व सिक्कों से पता चल जाता है। इतिहास को जानने की इस अनूठी शुरुआत शहर के ओमनगर मोहल्ला निवासी पूर्व सैनिक अविनाश अग्निहोत्री ने शुरू की है। वो अभी तक कनिष्क से लेकर कुषाण काकल के सिक्के जिलेभर की विभिन्न जगहों से जुटा चुके हैं। इन सिक्कों के आधार पर वो उन स्थानों के इतिहास को भी संजो रहे हैं।
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उनके इस शोध में खास बात तो यह निकलकर सामने आई है कि बीहड़ में यमुना नदी किनारे स्थित जिस भटपुरा गांव को अंग्रेजों ने 1858 की क्रांति के दौरान गोलाबारी में नष्ट कर दिया था। वहां की करारों में ये सिक्के मिल रहे हैं। गांव भले ही खत्म हो गया हो लेकिन ये सिक्के भटपुरा गांव की याद दिला रहे हैं। खास बात तो यह है कि भटपुरा में कनिष्क काल व कुषाण काल के सिक्के मिले हैं। उनका यह शोध बताता है कि गढ़ी माता मंदिर, खरका व भटपुरा यमुना नदी किनारे सालों पहले मंगलाकाली मंदिर के पास बसे थे। यह पर स्थित तपा बाबा की करार पर अक्सर ये तांबे के सिक्के मिलते हैं। 11वीं, 12वीं व 15वीं ईश्वी के ये सिक्के इन गांवों के वजूद को बयां कर रहे हैं।
यहां पर 1835 ईस्वीं का ताबे का सिक्का भी मिला है, जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से जारी किया गया था। पहली व दूसरी सदी में चलने वाली पुरातन मुद्राओं में शेख कौड़ी भी उन्होंने जुटाई है। अविनाश अग्निहोत्री बताते हैं कि वो इतिहास में दर्ज पुरातन गांवों के लोगों से लगातार संपर्क में रहते हैं। भले ही वो गांव अब न हो लेकिन वहां पर अक्सर आवागमन करते हैं। लोगों को मिट्टी खोदाई व बारिश में मिट्टी कटान में जो पुरातन सिक्के मिलते हैं। वो उन्हें दे देते हैं। मंगलाकाली से सटे भटपुरा गांव व आसपास क्षेत्र में ही कुल 15 सिक्के मिले हैं, जिनके जरिए उन गांवों के इतिहास का संकलन तैयार कर रहे हैं। (संवाद)
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बूढादाना गांव में मिला इस्माइल सूरी के शासन काल का सिक्का

बूढादाना गांव में हाल ही में कवि निर्मल पांडेय को मिट्टी की करार से एक सिक्का मिला था। जिसे उन्होंने अविनाश अग्निहोत्री को शोध करने के लिए दिया। यह सिक्का तांबे का हैं जिसमें फारसी भाषा लिखी हुई है। अविनाश अग्निहोत्री बताते हैं कि बूढादाना में मिला सिक्का शेरशाह सूरी के पिता इस्माइल सूरी के शासन काल का है। इसमें 1550 ईस्वी का जिक्र है। बूढादाना गांव में देश की आजादी से पहले कायस्थों की जमींदारी थी। उससे पहले क्षत्रिय गौर राजा हुआ करते थे। वहीं, उससे भी पहले मुगलों ने यहां पर शासन किया।

फोटो-20एयूआरपी01- बूढादाना में मिला सूरी वंश का सिक्का। संवाद

फोटो-20एयूआरपी01- बूढादाना में मिला सूरी वंश का सिक्का। संवाद

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