फोटो-25- तिलक नगर मोहल्ला स्थित मकान में संचालित कोचिंग। संवाद
औरैया। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद दिखावे के लिए शुरू हुई प्रशासनिक छापे मारी ने जिले के कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरियों की सच्चाई उजागर कर दी। यहां बिना रजिस्ट्रेशन व बिना फायर एनओसी के बेसमेंट और संकरी गलियों में कई कोचिंग-लाइब्रेरी चलती मिलीं।
हकीकत यह है कि जिले में शिक्षा विभाग के पास महज 34 कोचिंग सेंटर पंजीकृत हैं जबकि अवैध रूप से सैकड़ों की संख्या में कोचिंग चल रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से किसी के पास भी फायर एनओसी तक नहीं है। शहर का तिलक नगर मोहल्ला कोचिंग का सबसे बड़ा हब बन चुका है लेकिन सुरक्षा के नाम पर यहां सन्नाटा पसरा है। संकरी गलियों और आवासीय भवनों में चल रही इन कोचिंगों में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही संकरा रास्ता है।
आसपास के लोग बताते हैं कि अगर कोई हादसा या आगजनी हो जाए तो बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा। वहीं अजीतमल कस्बे के ब्लॉक रोड, गढ़ा रोड और तिराहा अजीतमल में तो नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में कोचिंग और स्टडी लाइब्रेरी संचालित की जा रही हैं।
इनमें न तो आपातकालीन निकास है और न ही वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था। बिधूना कोतवाली के गांव रुरुगंज में मकान की पहली मंजिल पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के 30 से 35 बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोचिंग में कोई मानक पूरे नहीं हैं।
फोटो-25- तिलक नगर मोहल्ला स्थित मकान में संचालित कोचिंग। संवाद
फोटो-25- तिलक नगर मोहल्ला स्थित मकान में संचालित कोचिंग। संवाद
फोटो-25- तिलक नगर मोहल्ला स्थित मकान में संचालित कोचिंग। संवाद