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नवरात्र पर फलों के दामों में उछाल

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बिधूना (औरैया)। नवरात्र पर्व पर फलों में दामों में तेजी से उछाल आया है। दाम बढ़ने के कारण लोगों का कहना है कि खरीदारी में कटौती की है। मगर चढ़ावा और फलाहारी के लिए कुछ तो खरीदना ही पड़ता है। नवरात्र के कारण मंदिरों व घरों में भजन-कीर्तन हो रहे हैं। प्रसाद वितरण के लिए फल जरूरी होता है। इसलिए महंगाई के बावजूद भी कुछ न कुछ खरीद रहे हैं।
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नवरात्र शुरू होने के साथ ही फलों में महंगाई देखने को मिल रही है। तीन दिन में सेब के दामों में 25 से 30 रुपये प्रति किलो इजाफा हुआ है। इसके अलावा केला, पपीता, नारियल आदि फलों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। उपवास रखने वाले अधिकांश श्रद्धालु फलों का आहार करते है। ऐसे में मांग बढ़ने के कारण कीमतों में भी उछाल आया है। फल विक्रेता राजा और दीपक बताते है कि नवरात्र के दौरान फलों की मांग के चलते थोक मंडियों में व्यापारियों ने दामों को बढ़ा दिया। जिससे दामों में उछाल आया है।
पहले के रेट अब के रेट
सेब 70 से 80 रुपये 100 से 110 रुपये किलो
केला 25 से 30 दर्जन 40 से 45 रुपये दर्जन
नारियल 30 से 40 रुपये 50 से 70 रुपये पीस
अनार 70 से 80 रुपये किलो 100 से 110 रुपये किलो
नवरात्र पर्व के साथ ही सहालग का दौर शुरू हो गया है। नवरात्र शुरू होते ही हर वर्ष फलों में महंगाई आती है। जिससे सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग के लोगों को व्रत में परेशानी होती है। दो दिन में ही एकाएक फलों के दाम बढ़े हैं।
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नवरात्र पर्व पर प्रसाद वितरण और पूजन में फलों का अधिक प्रयोग होता है। दुकानदार इसी का फायदा उठा रहे हैं। जबकि थोक मंडियों में न तो फल आने कम हुए और न ही महंगाई है। इस पर अंकुश लगाना चाहिए।
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पेट्रोल ने लगाया शतक, गैस की कीमत में भी लगी आग
औरैया। पेट्रोल और रसोई गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे हर वर्ग के लोग परेशान हैं। शनिवार को जिले में पेट्रोल की कीमत 101.30 थी। वहीं डीजल 91.93 रुपये लीटर रहा। हाल ही में 15 रुपये गैस की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को पंप पर पेट्रोल भरवाने पहुंचे लोगों में नाराजगी के साथ निराशा दिखी। कोई महंगाई को कोसता नजर आया तो किसी ने सरकार की नाकामी बताया।
गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। महंगाई नियंत्रित करने में सरकार नाकाम है। कोरोना महामारी के कारण करीब दो वर्ष से नौकरी पेशा लोगों का वेतन नहीं बढ़ा, लेकिन इस दौरान पेट्रोल और गैस लगातार बढ़े हैं। प्राइवेट नौकरी करने वालों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है।
काम तो करना ही है। आज के दौर में रोजी-रोटी बाइक से जुड़ी है। पेट्रोल चाहें 50 रुपये हो या 101 रुपये। बाइक तो चलानी ही है। महंगाई बढ़ रही है। अब ईंधन पर प्रतिमाह 500 रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। यानी महीने में मुनाफे की रकम अब पेट्रोल के भेंट चढ़ जाएगी।
पॉकेट मनी की अधिकतम रकम तो पेट्रोल भरवाने में खर्च हो जाती है। अब और खर्च बढ़ गया। स्कूल आना-जाना भी मंहगा होता जा रहा है। पहले पेट्रोल भरवाने के साथ ही कुछ खानपान में भी खर्च कर लेतीं थीं। अब पेट्रोल में सारे रुपये खर्च हो जाते हैं। बचता नहीं है।
कार रखना अब घाटे का सौदा है। इंश्योरेंस मंहगा हो गया, टोल टैक्स मंहगा है। रोड टैक्स के रेट बढ़े और पेट्रोल 101.30 पार कर चुका है। रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार को चाहिए पेट्रोल व डीजल से करों का बोझ कम कर जनता को राहत देना चाहिए।
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