बेला (औरैया)। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ के इको गार्डन में चल रहे राज्यव्यापी धरने में औरैया जिले के ज्यादातर सीएचओ के शामिल होने से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। बृहस्पतिवार को बेला,ककोर, बिधूना, एरवाकटरा सहित अन्य जगहों के स्वास्थ्य उपकेंद्र पर ताला लटका रहने के कारण दूर-दराज से पहुंचे मरीजों को बेइलाज लौटना पड़ा। दवा और प्राथमिक इलाज न मिलने से बेबस मरीजों को सीएचसी बेला की दौड़ लगानी पड़ी।
बेला उपकेंद्र के सीएचओ राजकुमार भी इस आंदोलन में शामिल होने लखनऊ पहुंचे थे। उपकेंद्र बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ी, जो रोजमर्रा की दवाओं के लिए केंद्र पर निर्भर हैं। सीएचओ की प्रमुख मांगों में पीबीआई (परफॉरमेंस बेस्ड इंसेंटिव) को मूल मानदेय में शामिल करना, 60 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय या 4800 ग्रेड पे देना, पृथक कैडर बनाकर नियमितीकरण करना और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करना समेत बीमा कवर, डीए-एचआरए, कैशलेस इलाज की सुविधा, अर्जित अवकाश आदि शामिल हैं। सामूहिक आंदोलन के चलते ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप नजर आईं। जिससे ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी हद तक प्रभावित रहीं।