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Auraiya News: मोबाइल से ऑटिज्म का शिकार हो रहे बच्चे

Sat, 07 Feb 2026 12:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। मोबाइल और टैबलेट की बढ़ती लत अब बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रही है।
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जिले में स्थित मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनमें बच्चे ऑटिज्म जैसे लक्षण दिखा रहे हैं। परिजन जब बच्चों की बोलने, समझने और दूसरों से घुलने-मिलने की क्षमता में कमी देखते हैं, तब उन्हें डॉक्टर के पास लेकर पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की डॉ. अनामिका राजपूत के अनुसार अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में संपर्क न बनाना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, अकेले रहना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद न आना और देर से बोलने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में ये लक्षण ऑटिज्म से मिलते-जुलते होते हैं। मेडिकल कॉलेज में ऐसी शिकायतें लेकर रोजाना पांच से सात मरीज आ रहे हैं।
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मनोरोग चिकित्सक का कहना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती। यदि समय रहते इलाज और सही परवरिश मिल जाए। इलाज के लिए बच्चों को बिहेवियर थेरेपी, स्पीच थेरेपी और प्ले थेरेपी दी जाती है, जो कई महीनों तक चलती है। नियमित काउंसलिंग के जरिये माता-पिता को भी समझाया जाता है कि वह बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और उनके साथ समय बिताएं।
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बताया कि दो से पांच वर्ष की उम्र के बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। माता-पिता बच्चे को चुप कराने या व्यस्त रखने के लिए घंटों मोबाइल पकड़ा देते हैं, इससे बच्चा बाहरी दुनिया से कटने लगता है। उसका सामाजिक और मानसिक विकास कम हो पाता है।

इस पर दें ध्यान
- दो साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल न दें।
- पांच साल तक के बच्चों का स्क्रीन टाइम दिन में एक घंटे से कम रखें।
- बच्चों के साथ खेलें, बात करें और कहानियां सुनाएं।
- बाहर खेलने और परिवार के साथ समय बिताने की आदत डालें।
- किसी भी असामान्य व्यवहार पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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