दिबियापुर। चार पीएचसी को समेटे दिबियापुर की सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। यहां छह पदों के मुकाबले महज दो एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती है। शेष डॉक्टर संविदा पर काम चला रहे हैं। कई रोगों के विशेषज्ञ अब तक तैनात नहीं हुए हैं। इससे मरीजों को गंभीर मामलों में जिला अस्पताल या निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
गौरतलब है कि बसपा सरकार में दिबियापुर पीएचसी को सीएचसी में उच्चीकृत किया गया था। इस सीएचसी में भाग्यनगर ब्लॉक के गांवों के अलावा फफूंद, ककोर, सोधेमऊ व जगजीवनपुर पीएचसी संबद्ध की गई हैं। सीएचसी में छह एमबीबीएस डाॅक्टरों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन दो ही एमबीबीएस डाॅक्टरों की तैनाती है। इसके अलावा यहां स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, दंत रोग, हड्डी रोग, नेत्र रोग व बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हुई है। इससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
हालात यह है कि गंभीर या एक्सीडेंटल मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 250 से लेकर 300 तक मरीज इलाज व जांच के लिए आते हैं। यही नहीं, सीएचसी के पास ही स्थित 50 शैय्या मातृ शिशु अस्पताल में भी कोई स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व बाल रोग डाॅक्टर की तैनाती नहीं हैं। नॉर्मल डिलीवरी नर्सिंग स्टाफ ही करवाती है। अधीक्षक डॉ. विजय आनंद ने बताया कि डॉक्टरों की तैनाती की मांग की गई है।
बताया कि सीएचसी में टाइफाइड, मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, हेपेटाइटिस, बलगम, हीमोग्लोबिन, सीबीसी, ब्लड, पेशाब से गर्भ की जांच, ग्लूकोज, ईएसआर, एचआईवी समेत अन्य जांचों की सुविधा है। एक्सरे मशीन के उपकरण में खराबी होने से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
फोटो-21एयूआरपी03- दिबियापुर सीएचसी के एक्सरे कक्ष में जड़ा ताला। संवाद