औरैया। सदर ब्लॉक की जैतापुर गोशाला में संरक्षण के नाम पर मवेशियों को काला पानी की सजा दी जा रही है। पूरे परिसर में गंदगी के बीच पीने के लिए सड़ा बदबूदार काला पानी दिया जा रहा है।
सदर ब्लाॅक की सबसे बड़ी गोशाला जैतापुर ग्राम पंचायत में है। यहां पर गोशाला में 500 से ज्यादा मवेशियों को संरक्षण दिया जा रहा है। मवेशियों की तादाद अच्छी खासी होने की वजह से यहां पर सरकारी धन को खूब खपाया जाता है। बिल वाउचर इसकी गवाही देते हैं। यहां पर शुरुआती बारिश के बाद ही परिसर में पानी अभी तक भरा हुआ है। कुछ हिस्से में ही खड़ंजा व पक्का परिसर है।
काफी दिनों से परिसर में भरा गंदा पानी काला हो चुका है। गंदगी का आलम है। दलदल जैसी स्थिति भी है। कमजोर मवेशी इस दलदल में फंस जाते हैं। परिसर में दिनभर ज्यादातर मवेशी खड़े रहते हैं। गोवंंशों का स्वाभाविक लक्षण है कि वह सूखी जमीन पर ही बैठेंगे न मिली तो खड़ी रहेंगी। काला पानी की सजा के बीच उन्हें खड़े रहने की भी सजा मिल रही है।
सीमित दायरे में 500 से ज्यादा मवेशियों को सटकर खड़े रहते हैं। मवेशियों में समझदारी बढ़ी है, यही वजह है कि आपस में भिड़ने के बजाय तालमेल बैठाकर सूखी जमीन पर खड़े रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं, लेकिन उन बेजुबानों को क्या पता कि परिसर में भरा गंदा काला पानी जहरीला हो चुका है। पीने से उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और मौत भी हो सकती है। रविवार को सेवादार के कमरे पर ताला जड़ा था। मौके पर गोशाला में कोई था भी नहीं।
भूसे को बारिश से बचाने के नहीं पुख्ता इंतजाम
आम पशुपालक मवेशियों के चारे व दाने को बारिश से बचाने के लिए तमाम इंतजाम करते हैं, लेकिन जैतापुर गोशाला तो सरकारी व्यवस्था के तहत है। यहां विशेष इंतजाम के तौर पर टिनशेड बनाकर सूखा भूसा रखा गया है, लेकिन यहां पर बारिश का पानी पहुंच रहा है। लगाई गई पाॅलीथिन भी भूसे को पानी से नहीं बचा पा रही है। काफी मात्रा में भूसा सड़ भी चुका है। आसपास मौजूद गोवंश इस सड़े हुए भूसे को ही खाते नजर आए।
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अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद बदहाल पड़ी गोशाला
सदर ब्लाक की सबसे बड़ी गोशाला जैतापुर है। यहां अक्सर अधिकारियों का आना जाना होता है। गोपाष्टमी पर कार्यक्रम भी होते हैं, लेकिन इस सब के बीच भी गोशाला की यह स्थिति अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। मामला उजागर होगा तो सरकारी महकमा हरकत में आएगा। इस सब के बीच जो अनदेखी व लापरवाही बरती गई, उसे यह बेजुबान कैसे बयां कर पाएंगे। उनकी बात कहने वाला कौन है।
बाहर मिले ग्रामीणों की बातचीत ने चौंकाया
गोशाला की बदहाल स्थिति को लेकर बाहर मिले ग्रामीणों ने बताया कि यहां मवेशियों की स्थिति बहुत ही खराब है। ज्यादातर मवेशी कमजोर हैं। कोई इनकी सुध नहीं लेता। यदि कोई आता है तो उसे प्रलोभन देकर चुप करा दिया जाता है। सब कुछ चलता है। पैसे में बहुत दम है।
बोले जिम्मेदार-
‘गोशाला में भरे गंदे पानी को निकाला जा रहा है। मवेशियों को पीने में साफ पानी दिया जाता है। किसी तरह की अव्यवस्था न हो इसे लेकर ध्यान दिया जा रहा है।’-बब्बन मौर्या, खंड विकास अधिकारी