अमर उजाला के अभियान के बाद डीएम सख्त हुए हैं। इसका असर बुधवार को एआरटीओ में देखने को भी मिला। कार्यालय के बाहर जगह-जगह दलालों का प्रवेश वर्जित, के फ्लैक्स लगाए गए हैं। कार्यालय आने वालों की वीडियोग्राफी कराई गई। एआरटीओ खुद पहली बार वर्दी पहनकर कार्यालय में पहुंचे। सख्ती को देख दलाल विकास भवन के पीछे माहौल भांपते रहे।
एआरटीओ दलालों का अड्डा बना हुआ है। यहां सामान्य आदमी के लिए काम कराना मुश्किल है। अमर उजाला ने यहां की बदइंतजामियों पर अभियान शुरू किया तो पिछले बुधवार को एसडीएम व सीओ ने दलालों की दुकानों को जेसीबी से हटवा दिया था।
इसके बाद भी दलाल नहीं माने। यह एआरटीओ में लगातार काबिज रहे। डीएम की सख्ती भी बेअसर रही। अमर उजाला के मुद्दा बनाने के बाद प्रशासन सख्त हुआ। इस पर एआरटीओ मनोज कुमार सुबह ड्रेस पहनकर पहुंचे।
इन्होंने कार्यालय आने जाने वालों की वीडियोग्राफी कराई। इसके अलावा दीवारों पर दलालों का प्रवेश वर्जित के फ्लैक्स भी लगवाए। सख्ती देखकर दलाल विकास भवन के पीछे बैठकर जायजा लेते रहे। इक्का दुक्का दलालों ने अंदर जाने की कोशिश की। सख्ती के बाद यह फाइलें लेकर चले गए।
प्रभाष क्यों ताला लटका कर चले गए
प्रभाष बाबू सख्ती के बाद अपने कार्यालय पर ताला लटका कर चले गए। इससे फिटनेस व रजिस्ट्रेशन कराने आए लोग ताला लगा देख भटकते रहे। इससे उनके विभाग का आज काम नहीं हो पाया। कुछ लोगों का कहना था कि यह दलालों से मिलीभगत है। इससे कि सामान्य आदमी काम न करा सके।
व्यवस्था बदली जा रही है। जल्द पूछताछ काउंटर भी खोला जा रहा है। दलाल किसी भी प्रकार से अंदर नहीं आ पाएंगे। उन्हें दलालों के नाम नहीं मालूम नहीं तो वह डीएम को सूची सौंप देते।
मनोज कुमार
एआरटीओ