गांव नगरिया निवासी दुर्गा शरण शाक्य का पुत्र आशुतोष (27) का तीन
साल पहले सीमा सुरक्षा बल में सिलेक्शन हुआ था। आशुतोष की पहली तैनाती
त्रिपुरा में थी। दो दिसंबर को आशुतोष छुट्टी लेकर पंचायत चुनाव में वोट
डालने के लिए घर आए थे। पांच दिसंबर को वह वोट डालने के बाद वापस ड्यूटी पर
त्रिपुरा चले गए।
जहां पर ड्यूटी के दौरान अचानक उसके सर में दर्द हुआ।
आशुतोष को त्रिपुरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर इलाज के दौरान
मंगलवार की शाम उनकी मौत हो गई। आशुतोष की मौत की सूचना उसके परिजनों को
फोन पर दी गई। आशुतोष की मौत की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया।
मृतक
आशुतोष अपने घर में सबसे बड़ा था। उसके ही कंधे पर पूरी जिम्मेदारी थी।
आशुतोष की शादी फरवरी 2013 में हुई थी, उनके एक साल की पुत्री कीर्तिका है।
गुरुवार की सुबह जैसे ही आशुतोष का शव नगरिया पहुंचा तो पूरे गांव में
कोहराम मच गया। हर किसी ग्रामीण की आंखें नम थी।
जवान का शव देखने के लिए
गांव में भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों की भीड़ अधिक होने के कारण जवान के
शव को मेला ग्राउंड में रखा गया। जहां पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर जवान
आशुतोष को अंतिम विदाई दी। जवानों की एक टुकड़ी ने जवान आशुतोष को सलामी
दी।
उसके बाद जवान के शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में उनके खेत पर
किया गया। इस मौके पर बीएसएफ के जवान रनवीर गौर, लक्ष्मण द्विवेदी,
सोमेंद्र सिंह, सरुेश, एन नगराजा, महावीर प्रसाद, जयप्रकाश, रणवीर सिंह,
क्षेत्राधिकारी बालकराम, थानाध्यक्ष शिवकुमार व तहसीलदार समेत अन्य अधिकारी
मौजूद रहे।
बीमारी के चलते त्रिपुरा में हुई बीएसएफ जवान आशुतोष की मौत ने
उसकी पुत्री कार्तिका के सिर से पिता का साया उठ गया। जब जवान आशुतोष की
पुत्री कार्तिका को उसके शव के पास लाया गया तो ग्रामीणों की आंखों में
आंसू छलक उठे।
उस मासूम को यह नहीं पता था कि अब उसके सिर से पिता का हाथ
उठ चुका है। वहीं जवान आशुतोष की पत्नी अंजली बेहोश होकर जमीन पर गिर रही
थी।