ठंडे पड़े अग्नि पीड़ितों के चूल्हे
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कोतवाली क्षेत्र के गांव गोहना में चूल्हे की चिंगारी से बुधवार को 14 घर तबाह हो गए थे। अब अग्नि पीड़ित परिवार रोटी के लिए मोहताज हैं। गुरुवार को इनके चूल्हे ठंडे रहे। गृहस्थी का जला सामान देख इनके अंासू नहीं रुक रहे थे। पड़ोसियों ने कुछ खाने को भेज दिया तो खा लिया। दिन में कड़क धूप इनके चेहरे झुलसाती रही। भीषण अग्निकांड के बाद भी गांव में कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। पीड़ितों ने बताया कि हमारी बर्बादी में अंासू पोछने वाला कोई नहीं है।
30 हजार नगद जल गए
अग्नि पीड़ित संदीप कुमार ने बताया कि वह पांच भाई हैं। अभय व दिनेश कुमार अलग घर में रखते हैं। देवेंद्र व धर्मेंद्र पिता रामस्वरूप के साथ रह रहे हैं। हाल ही में गेहूं बेचे थे। बच्चों की पढ़ाई व निजी काम के लिए 30 हजार रुपये बक्से में रखे थे। अग्निकांड में नगदी समेत गृहस्थी का सारा सामान जलकर राख हो गया।
एक साल की कमाई, पल भर में गंवाई
अग्नि पीड़ित शिव कुमार ने बताया कि वह पंजाब में प्राइवेट नौकरी करता है। ससुराल में 28 अप्रैल को साली संगीता की शादी है। शादी में शामिल होने के लिए वह 18 अप्रैल को गांव आया था। एक साल में पेट काटकर 50 हजार रुपये जोड़े थे। इन्हें लेकर आया था। आग से एक साल की कमाई पल भर में राख हो गई।
आग में जला पढ़ाई क ा सपना
अभय प्रताप ने बताया कि अनाज बेचकर 35 हजार रुपये जमा किए थे। इकलौते बेटे बेटू को औरैया शहर के अच्छे स्कूल में पढ़ाने का सपना था। आग में यह सपना जल गया। आग से 35 हजार रुपयेे के अलावा गृहस्थी का सारा सामान जलाकर राख हो गया।
अग्निकांड के बाद गुरुवार को भूख-प्यास से पीड़ित बच्चे राख खंगालते नजर आए। अग्नि पीड़ितों के घरों में चूल्हा नहीं जला। इनके पास पहनने के कपडे़ तक नहीं हैं। आग से पीड़ित बेबस नजर आए। इनकी अंाखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।