औरैया। जिले में बासमती चावल के जीआई टैग मिलने और देशी घी को दर किनार करने को लेकर व्यापारी नेताओं में सरकार के इस कदम का विरोध दिखाई दे रहा है। व्यापारियों का कहना है कि औरैया जिले में बासमती चावल का कारोबार न के बराबर होने के बाद भी उसे जिले के नाम से टैग किया गया है। जबकि औरैया जिले की देसी घी को मुकाम नहीं मिल सका।
देशी घी की मंडी के नाम से विख्यात औरैया जिले की दशकों से अपनी अलग पहचान रही है। लगभग 50 साल पहले जिले में देसी घी बनाने की भट्टियां धधकतीं थीं। हालांकि इस कारोबार में अधिक लागत लगने और आर्थिक मदद न मिलने के चलते कारोबारियों ने हाथ पीछे खींच लिए थे। अभी भी कुछ लोग इस काम को बाखूबी अंजाम दे रहे हैं।
ओडीओपी के तहत जिले में घी के कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। खास बात यह है कि सरकार की ओर से अभी हाल ही में औरैया को बासमती चावल के नाम से जीआई टैग दिया गया है। इसको लेकर व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त है। व्यापारियों ने सरकार से औरैया जिले को देशी घी के नाम से जीआई टैग दिए जाने की मांग की है।