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बैंकों में टोकन का खेल, व्यवस्था फेल

Sat, 12 Nov 2016 12:11 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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बैंक ऑफ बड़ौदा कखावतू शाखा में रुपये का लेन देन करते बैंक कर्मी - फोटो : अमर उजाला
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 बड़े नोट बंद हो जाने के बाद खाते से उपभोक्ता को दस हजार व आईडी पर चार हजार रुपये बदलने की सरकार की व्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्रों में मजाक बनाया गया। पूर्वांचल बैंक बमुरीपुर व सेंट्रल बैंक बेला में ग्रामीणों के रुपये जमा किए गए। लेकिन करेंसी वितरण के नाम पर उन्हें पूरे दिन लाइन में खड़ा रखा गया। बेला सेंट्रल बैंक में सिर्फ टोकन बांटने पर उपभोक्ताओं ने हंगामा किया।
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बेला स्थित सेंट्रल बैंक में पुलिस की मदद से बैंक कर्मियों ने अपने चहेतों को टोकन देकर रुपये जमा करने का सिलसिला शुरू किया। इस पर शाखा के बाहर खड़े अन्य उपभोक्ता आक्रोशित हो गए। मामला बिगड़ते देख बैंक प्रशासन ने पुलिस को बुलवा लिया। लोगों ने बैंक कर्मियों पर परेशान करने का आरोप लगाया। देर से बैंक शाखा खुलने के बाद पहुंचे लोगों को एक बार फिर से टोकन देकर शनिवार को भुगतान लेने की बात कहते हुए टरका दिया गया।

वहीं ग्राम बमुरीपुर स्थित पूर्वांचल बैंक पर भी यही स्थिति रही। सुबह साढ़े दस बजे बैंक खुलने के बाद बैंक कर्मियों ने लोगों से आईडी के साथ पांच सौ व एक हजार की करेंसी जमा करानी शुरू की। इस दौरान बैंक कर्मियों ने ग्राहकों को जल्द नोट बदलने का आश्वासन दिया। लेकिन दोपहर तीन बजे के बाद बैंक प्रशासन ने स्टाफ की कमी का बहाना बताकर हाथ खड़े कर दिए। लोगों में आक्रोश दिखा तो बैंक प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया। बैंक मैनेजर एमके शुक्ला ने बताया कि उनके पास स्टाफ की कमी है। ग्राहकों को एक ही साथ नोट बदलवाने हैं। ऐसा कर पाना उनके लिए संभव नहीं है। बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा कखावतू में भी उपभोक्ताओं की भीड़ दिखी।
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मासूम को देकर मैनेजर ने किया रहम
बैंक ऑफ बड़ौदा की कखावतू शाखा में एक महिला अपने 20 दिन के बच्चे लिए रुपये बदलवाने के लिए लाइन में दिखी। महिला ने अपना नाम गुड्डी देवी पत्नी राजकुमार निवासी रुदौली बताया। उसने बताया कि वह पंद्रह सौ रुपये बदलवाने बैंक आई है। उसके पास इतने ही रुपये हैं। जरूरत पड़ने पर वह परिवार के खाने की व्यवस्था कहां से करेगी। इस दौरान महिला पर बैंक मैनेजर रवि रंजन की नजर पड़ी। उन्होंने मासूम बच्चे की खातिर महिला को बुलाकर उसके रुपये बदलवा दिए।
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