निजीकरण के विरोध में जिले की सभी बैंकें दूसरे दिन भी बंद रहीं। कर्मचारियों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया। इसके कारण दो दिन में करीब 170 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक कर्मियों ने कहा कि यदि शीघ्र मांगों को पूरा न किया गया तो वह बेमियादी हड़ताल करेंगे।
उत्तर प्रदेश बैंक इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर शहर की सभी बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी मंगलवार सुबह कानपुर रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर एकत्र हुए।
उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे। जिलाध्यक्ष रघुवीर तिवारी, सलिल सक्सेना ने कहा कि सरकार एक-एक कर सरकारी संपदा बेच रही है।
सरकारी बैंकों का निजीकरण होने से देश की अर्थ व्यवस्था पर असर दिखेगा। जितेंद्र तोमर ने कहा कि देश की जनता अपनी बचत सरकारी बैंकों में जमा करती है।
उसे सरकारी बैंकों पर विश्वास है। यदि बैंकों का निजीकरण होगा तो जनता का भरोसा भी कम होगा। इसके साथ ही बैंक कर्मियों में भी असुरक्षा की आशंका रहेगी। बैंकों का निजीकरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस मौके पर विनय अग्रवाल, श्यामजी, अनूप कुमार, धर्मेंद्र पोरवाल, योगेश कुमार, रामचंद्र, लल्ला सिंह शाक्य, आशीष पुरवार, विनय कटियार, संतोष तिवारी, जगदीश सिंह, आशुतोष सिंह, पीएम मिश्रा, देवराज सिंह, देवेश त्रिपाठी, मनोज कुमार, लवकेश कुमार, आशीष कुमार, संजय चौधरी, हरि नारायन अग्रवाल समेत कई बैंक कर्मी मौजूद रहे।
उधर कंचौसी में बैंक न खुलने से खाताधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पेंशन, जनधन, मनरेगा समेत तमाम योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को खासी परेशानी हुई। सेंट्रल बैंक के असिस्टेंट मैनेजर सुमित सिंह ने बताया कि लगभग बीस लाख का लेनदेन प्रभावित रहा।
बैंकों की हड़ताल के बीच एटीएम बूथ बंद रहने से भी उपभोक्ता परेशान रहे। रुपये निकालने के लिए एक से दूसरे एटीएम बूथ तक भटकते रहे। मंगलवार दोपहर कुछ लोगों को पता चला कि कानपुर रोड स्थित बैंक आफ इंडिया के एटीएम बूथ में रुपये हैं तो वहां भीड़ लग गई।
विनय यादव ने बताया कि वह औरैया बाजार करने आया था। यहां रुपये कम पड़ने पर एटीएम के चक्कर लगाते-लगाते थक गया। बैंक आफ इंडिया का एटीएम खुला मिलने पर राहत महसूस की है।