औरैया। जिला न्यायालय में अब वकील, मुंशी, कर्मचारी और अन्य लोग परिचयपत्र दिखाकर ही प्रवेश कर सकेंगे। यह आदेश जिला जज ने कचहरी के दोनों गेटों पर लगे सुरक्षा बलों को दिए हैं।
सोमवार को जिला जजी खुलते ही जिला जज अनिल कुमार वर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। शनिवार को एसओजी और वकीलों के बीच हुए विवाद की घटना की जांच करने के बाद पाया कि गेट नंबर एक तथा गेट नंबर दो अधिकांश खुले रहते हैं। इससे वादकारी, अधिवक्ता एवं अन्य व्यक्ति न्यायालय परिसर में प्रवेश करते हैं। सभी मेटल डिटेक्टर से नहीं निकलते हैं, जिससे न्यायालय में असुरक्षा का वातावरण होने की आशंका है।
उन्होंने न्यायालय सुरक्षा प्रभारी को आदेश दिए कि सभी मेटल डिटेक्टर से गुजरने वालों को प्रवेश कराते समय उनके पहचानपत्र, आधारकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि देखें और मेटल डिटेक्टर से होकर ही निकालें। यदि कोई बैग आदि सामान लिए हो तो उसे स्कैनर से जांच करने के बाद भी प्रवेश करने दें।
जिला जज ने शनिवार की घटना को गलत ढंग से प्रस्तुत करने वाले वकीलों को बुलाया और सीसीटीवी का हवाला देते हुए नाराजगी भी जताई। पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र शुक्ला ने स्पष्ट किया कि उन्हें वकीलों ने जो बताया उसे सही मानकर जिला जज के समक्ष रख दिया।
जिला जजी में डीबीए ने फर्जी वकीलों की धर पकड़ का अभियान छेड़ रखा है। पिछले दिनों जिला बार की बैठक में बगैर सीओपी नंबर वाले वकीलों को न्यायालय में प्रवेश पर रोक और फर्जी वकीलों को पकड़ने के लिए टीम गठित की गई। सोमवार को टीम ने ऐसे कई लोगों को पकड़ा तथा उन्हें चेतावनी दी। डीबीए महामंत्री प्रदीप कुमार तिवारी ने बताया कि टीम ने एक मुंशी तेजपाल को पकड़ा, जो कि अपने को वकील बताकर सीधे सादे लोगों को चूना लगाने में माहिर था। इसी तरह कई बगैर सीओपी नंबर वाले वकीलों को वकालतनामा न लगाने की चेतावनी दी गई।